| पहलू | ऋग्वैदिक काल (~1500–1000 ई.पू.) | उत्तरवैदिक काल (~1000–600 ई.पू.) |
|---|---|---|
| क्षेत्र | सप्त-सिंधु (सिंधु-गंगा क्षेत्र) | गंगा-यमुना दोआब तक विस्तार; 'आर्यावर्त' |
| अर्थव्यवस्था | पुरुष-प्रधान पशुपालन; बैल सबसे महत्वपूर्ण | लोहे ने खेती क्रान्ति लाई; भूमि स्थायी हुई |
| राजनीति | जन → विश → ग्राम; राजा-चुनाव होता था (सभा/समिति) | राजशाही मजबूत हुई; अश्वमेध, राजसूय यज्ञ |
| वर्ण व्यवस्था | ढीली; पेशे पर आधारित; बदली जा सकती थी | कठोर; जन्म-आधारित; चार वर्णों में विभाजन |
| महिला स्थिति | बेहतर; शिक्षा, सभाओं में भागीदारी | घटी; घर तक सीमित; विधवा विवाह कम |
| देवता | इंद्र (प्रमुख), वरुण, अग्नि, सोम | प्रजापति, विष्णु, रुद्र/शिव प्रमुख; इंद्र का महत्व कम |
| धर्म | सरल प्रकृति-पूजा; यज्ञ साधारण | जटिल यज्ञ, कर्मकांड; ब्राह्मण शक्तिशाली हुए |
वैदिक काल (ऋग्वैदिक व उत्तरवैदिक काल)
~1500–600 ई.पू. | UPSC GS पेपर I
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ऋग्वैदिक बनाम उत्तरवैदिक काल — तुलना
वैदिक साहित्य
🧠 स्मृति सूत्र: "ऋग् साम यजु अथर्व" — चार वेदों का क्रम
| ग्रंथ | प्रकार | विषय-वस्तु |
|---|---|---|
| ऋग्वेद | वेद | देवताओं की स्तुति में 1028 सूक्त (ऋचाएं); सबसे प्राचीन; 10 मंडल |
| सामवेद | वेद | ऋग्वेद की ऋचाओं का संगीतमय रूप; भारतीय संगीत की उत्पत्ति |
| यजुर्वेद | वेद | यज्ञ विधियाँ और मंत्र; 2 भाग: कृष्ण व शुक्ल |
| अथर्ववेद | वेद | जादू-टोना, औषधि, दैनिक जीवन; 4 वेदों में सबसे अलग |
| ब्राह्मण | गद्य ग्रंथ | यज्ञ और कर्मकांड की विस्तृत व्याख्या |
| आरण्यक | वन-ग्रंथ | वानप्रस्थियों के लिए; दर्शन की शुरुआत |
| उपनिषद | वेदांत | आत्मा-ब्रह्म, कर्म, पुनर्जन्म दर्शन; 108 उपनिषद |
| वेदांग | सहायक ग्रंथ | 6 अंग: शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद, ज्योतिष |
| सूत्र | संक्षिप्त नियम | गृह्यसूत्र (गृहस्थ धर्म), धर्मसूत्र (समाज नियम) |
| महाकाव्य | रामायण, महाभारत | उत्तरवैदिक परिपाटी की उपज; भक्ति की नींव |
| पुराण | 18 पुराण | देवताओं की कथाएं; गुप्त काल में अंतिम रूप पाई |
महत्वपूर्ण वैदिक शब्द
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| जन | जनजाति/कबीला — ऋग्वैदिक राजनैतिक इकाई |
| विश | कबीले का उपखंड (कई ग्राम) |
| ग्राम | गाँव — सबसे छोटी इकाई |
| सभा | बड़े-बुजुर्गों की परिषद |
| समिति | जन की आम सभा; राजा का चुनाव |
| विदथ | प्राचीन सभा; आर्थिक व धार्मिक कार्य |
| बलि | स्वैच्छिक भेंट/कर (प्रारंभ में); बाद में अनिवार्य |
| दासी-पुत्र | उत्तरवैदिक काल में शूद्र वर्ण |
| अठारह रत्नी | राजा के 18 पदाधिकारी — सेनानी, पुरोहित आदि |
| गोत्र | पितृ-पंक्ति की वंशावली — उत्तरवैदिक काल में विकसित |
दस राजाओं का युद्ध (दाशराज्ञ युद्ध)
⚔️ ऋग्वेद का सबसे महत्वपूर्ण युद्ध
→ दाशराज्ञ युद्ध — ऋग्वेद के 7वें मंडल में वर्णित
→ सुदास (भरत कबीला, राजा दिवोदास का पुत्र) vs दस राजाओं का गठबंधन
→ स्थान: रावी नदी (परुष्णी) के तट पर
🏆 परिणाम एवं महत्व
→ सुदास की निर्णायक विजय → भरत कुल की सर्वोच्चता स्थापित
→ 'भारत' नाम की उत्पत्ति भरत कबीले से मानी जाती है
→ पुरोहित परिवर्तन: विश्वामित्र → वसिष्ठ (सुदास के नए पुरोहित बने)
वैदिक समाज एवं अर्थव्यवस्था
🏛️ वर्ण व्यवस्था
→ ऋग्वैदिक काल: वर्ण व्यवस्था लचीली और कर्म आधारित; पेशा बदला जा सकता था
→ उत्तरवैदिक काल: जन्म आधारित और कठोर; पुरुषसूक्त (ऋग्वेद 10वाँ मंडल) में चार वर्णों का उल्लेख
📚 आश्रम व्यवस्था
→ ब्रह्मचर्य — विद्या अध्ययन (गुरुकुल)
→ गृहस्थ — पारिवारिक जीवन और सामाजिक कर्तव्य
→ वानप्रस्थ — वन में तपस्या और चिंतन
→ संन्यास — संसार का त्याग; मोक्ष की खोज
👩 स्त्रियों की स्थिति
→ ऋग्वैदिक काल: विदुषी स्त्रियाँ — घोषा, लोपामुद्रा, अपाला; उपनयन संस्कार का अधिकार
→ उत्तरवैदिक काल: शिक्षा सीमित हुई; सभाओं में भागीदारी घटी; विधवा विवाह कम
💰 अर्थव्यवस्था
→ ऋग्वैदिक: पशुपालन प्रधान → उत्तरवैदिक: कृषि प्रधान (लोहे के हल)
→ गाय = धन की इकाई; युद्ध को 'गविष्टि' (गायों की खोज) कहा जाता था
→ गोदान — दान में गाय देना सर्वश्रेष्ठ माना जाता था
→ निष्क — सोने का आभूषण/सिक्का; विनिमय का माध्यम
उपनिषदों का दार्शनिक योगदान
📖 प्रमुख उपनिषद
→ कुल 108 उपनिषद; प्रमुख: ईश, केन, कठ, मुण्डक, माण्डूक्य, छांदोग्य, बृहदारण्यक
→ 'सत्यमेव जयते' — मुण्डक उपनिषद से लिया गया (भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य)
🔯 मूल दार्शनिक सिद्धांत
→ ब्रह्म = परम सत्य; समस्त सृष्टि ब्रह्म से उत्पन्न
→ आत्मा = ब्रह्म — 'तत्त्वमसि' (तू वही है) — छांदोग्य उपनिषद
→ कर्म सिद्धांत — कर्म फल देता है; पुनर्जन्म का चक्र
→ मोक्ष = ज्ञान द्वारा जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति
🗣️ याज्ञवल्क्य-मैत्रेयी संवाद
→ बृहदारण्यक उपनिषद में वर्णित — भारतीय दर्शन का सबसे प्रसिद्ध संवाद
→ विषय: आत्मा का ज्ञान ही सच्चा धन है; भौतिक संपत्ति से मोक्ष नहीं मिलता
→ मैत्रेयी ने भौतिक धन त्यागकर आत्मज्ञान को चुना
त्वरित पुनरीक्षण
✅ प्रारंभिक परीक्षा के लिए अनिवार्य
→ सबसे प्राचीन वैदिक ग्रंथ: ऋग्वेद
→ भारतीय संगीत की उत्पत्ति: सामवेद
→ जादू-टोना और दैनिक जीवन: अथर्ववेद
→ यज्ञ विधियाँ: यजुर्वेद
→ आत्मा-ब्रह्म का दर्शन: उपनिषद
→ उत्तरवैदिक काल में लोहे का उपयोग: PGW (Painted Grey Ware) संस्कृति
→ इंद्र: ऋग्वैदिक काल में सर्वोच्च देवता; 250 से अधिक सूक्त
→ गायत्री मंत्र: ऋग्वेद के 3rd मंडल में (देवी सावित्री को)
→ दाशराज्ञ युद्ध: सुदास (भरत कबीला) की विजय → 'भारत' नाम की उत्पत्ति
→ 'सत्यमेव जयते': मुण्डक उपनिषद से; राष्ट्रीय आदर्श वाक्य
→ 'तत्त्वमसि': छांदोग्य उपनिषद — आत्मा = ब्रह्म
→ ऋग्वैदिक विदुषी स्त्रियाँ: घोषा, लोपामुद्रा, अपाला
→ गाय = धन की इकाई; युद्ध = 'गविष्टि'
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