महाजनपद और मगध का उदय

~600–321 ई.पू. | UPSC GS पेपर I

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📋 प्राचीन इतिहास श्रृंखला

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महाजनपद क्यों उभरे?

~600 ई.पू. तक, लोहे के उपकरणों और उन्नत खेती ने अतिरिक्त उत्पादन संभव किया। इससे बड़े राज्य बने जिन्हें महाजनपद (महान-जन-पद) कहा गया। बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में 16 महाजनपदों का उल्लेख है।

🧠 स्मृति सूत्र: "का को अं म वज्ज मल चे वत कु पं सू मत अव अश गं काम"

16 महाजनपद — पूरी सूची

#महाजनपदराजधानीक्षेत्रUPSC के लिए महत्व
1काशीवाराणसीबनारस क्षेत्ररेशम व्यापार; बाद में कोशल में शामिल
2कोशलश्रावस्तीपूर्वी UPबुद्ध के समय प्रजापति कोशल का उल्लेख
3अंगचम्पाभागलपुर, बिहारकर्ण से संबंध; मगध ने जीता
4मगधराजगृह (बाद में पाटलिपुत्र)दक्षिण बिहारसबसे शक्तिशाली; मौर्य, गुप्त साम्राज्य का आधार
5वज्जिवैशालीउत्तर-पूर्व बिहारगणतंत्र; लिच्छवि; विश्व का पहला गणतंत्र माना जाता है
6मल्लकुशीनारा/पावापूर्वी UPबुद्ध का महापरिनिर्वाण यहाँ; गणतंत्र
7चेदिसोत्थिवतीबुंदेलखंडमहाभारत का शिशुपाल यहाँ का था
8वत्सकौशाम्बीइलाहाबाद क्षेत्रराजा उदयन; बुद्ध के समकालीन
9कुरुइंद्रप्रस्थ (दिल्ली)दिल्ली-मेरठमहाभारत का स्थान
10पांचालअहिच्छत्र/काम्पिल्यबरेली-फर्रुखाबादमहाभारत के पांडव यहाँ से
11शूरसेनमथुरामथुरा क्षेत्रयूनानी स्रोतों में 'सुरसेनोई'
12मत्स्यविराटनगरजयपुर (राजस्थान)महाभारत का विराट यहाँ का था
13अश्मकपाटन/पोटनगोदावरी तट (महाराष्ट्र)सुदूर दक्षिण तक फैला एकमात्र जनपद
14अवंतिउज्जैन/महिष्मतीपश्चिमी MPबाद में मगध का भाग बना
15गंधारतक्षशिलापश्चिमी पंजाब, अफगानिस्तानतक्षशिला विश्वविद्यालय; ईरानी आक्रमण का प्रवेश द्वार
16कम्बोजराजपुर/हाटकअफगानिस्तान/कश्मीर सीमाईरानी साम्राज्य के संपर्क में

मगध के राजवंश

वंशसमयप्रमुख राजाविशेषता
हर्यंक वंश~544–412 ई.पू.बिम्बिसार, अजातशत्रुबिम्बिसार ने मगध को शक्तिशाली बनाया; अजातशत्रु ने काशी व वज्जि को जीता
शिशुनाग वंश412–344 ई.पू.शिशुनाग, कालाशोकअवंति को मगध में मिलाया; द्वितीय बौद्ध संगीति (वैशाली)
नंद वंश344–321 ई.पू.महापद्म नंद, धनानंदपहला 'सर्व-क्षत्रांतक' (सभी क्षत्रियों को जीतने वाला); विशाल सेना; धन संग्रह
मौर्य वंश321–185 ई.पू.चंद्रगुप्त, अशोकदेखें: मौर्य साम्राज्य

विदेशी आक्रमण

ईरानी आक्रमण:

साइरस II (~530 ई.पू.) — गंधार तक पहुँचा
डेरियस I (~518 ई.पू.) — गंधार और सिंध को ईरानी साम्राज्य में मिलाया; खर्ोष्ठी लिपि का प्रसार
जेर्क्सेज़ — भारतीय सैनिकों को यूनान के विरुद्ध इस्तेमाल किया

सिकंदर का आक्रमण (326 ई.पू.):

सिकंदर महान (मैसेडोन) ने हाइडेस्पीज़ युद्ध (झेलम) में पोरस को हराया; लेकिन पोरस के साहस से प्रभावित होकर राज्य वापस किया
सिकंदर की सेना ने व्यास नदी पर विद्रोह किया → वापस लौटना पड़ा
प्रभाव: भारत-यूनान संपर्क; व्यापार मार्ग; गंधार कला की नींव; 323 ई.पू. में बेबीलोन में मृत्यु

मगध की सफलता के कारण

🌍 भौगोलिक लाभ:

गंगा और सोन नदियों के संगम पर स्थित — जल मार्ग से व्यापार व सैन्य गतिशीलता
उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी — प्रचुर कृषि उत्पादन, जनसंख्या वृद्धि
घने जंगलों से हाथी प्राप्त — सेना को शक्तिशाली बनाने में सहायक

⛏️ खनिज संपदा:

राजगिर के निकट लोहा — हथियार व कृषि उपकरण निर्माण
दक्षिण बिहार में तांबा — सिक्के व अन्य उपयोग

👑 राजनीतिक कारण:

बिम्बिसार से शुरू — आक्रामक विस्तारवादी नीति; वैवाहिक गठबंधन (कोशल, वैशाली, मद्र राजकुमारियों से विवाह)
राजगिर (गिरिव्रज): पाँच पहाड़ियों से घिरा — प्राकृतिक दुर्ग
बाद में पाटलिपुत्र नई राजधानी बनी (शिशुनाग/नंद काल) — गंगा तट पर, व्यापारिक केंद्र

🛣️ व्यापार मार्ग:

उत्तरापथ (तक्षशिला → पाटलिपुत्र) और दक्षिणापथ — दोनों सड़कें मगध से गुज़रती थीं
गंगा — जलीय यातायात का सबसे बड़ा माध्यम; माल-ढुलाई और सैन्य गतिशीलता

गणराज्य बनाम राजतंत्र

विशेषतागणराज्य (गणसंघ)राजतंत्र
उदाहरणवज्जि (लिच्छवि), मल्ल, शाक्य, कोलियमगध, कोसल, वत्स, अवंति
शासन प्रणालीसभा/परिषद में निर्णय; गणतांत्रिकएकल शासक; वंशानुगत
उत्तराधिकारचुनाव/सर्वसम्मतिपिता से पुत्र
सैन्य शक्तिसंयुक्त सेना; सीमितबड़ी स्थायी सेना

🏛️ वज्जि संघ — विशेष:

8 कुलों/कबीलों का गठबंधन; लिच्छवि सबसे शक्तिशाली कुल
राजधानी: वैशाली — विश्व का पहला गणतंत्र माना जाता है
बुद्ध ने वज्जि की प्रशंसा की और कहा कि जब तक वे एकजुट रहेंगे, कोई उन्हें नहीं हरा सकता

📜 सप्त अपरिहानीय धर्म:

बुद्ध ने वज्जियों को 7 नियम बताए जिनसे वे अजेय रहेंगे:

नियमित रूप से सभा करें
एकमत होकर निर्णय लें
प्राचीन परंपराओं का पालन करें
बुजुर्गों का सम्मान करें
स्त्रियों की रक्षा करें
धार्मिक स्थलों का संरक्षण करें
संतों/अर्हतों का आदर करें

⚔️ गणराज्यों का पतन:

शक्तिशाली राजतंत्रों ने गणराज्यों को जीता — मगध ने वज्जि को हराया (अजातशत्रु)
आंतरिक कलह और एकता की कमी
सिकंदर काल तक कई गणराज्य विलुप्त हो चुके थे

दूसरा नगरीकरण

🏙️ नगरीकरण की दो लहरें:

प्रथम नगरीकरण: सिंधु सभ्यता (~2600–1900 ई.पू.)
दूसरा नगरीकरण: ~600 ई.पू. — गंगा मैदान में नए नगरों का उदय

🔧 कारण:

लोहे का व्यापक उपयोग — जंगल कटाई, कृषि विस्तार, अतिरिक्त उत्पादन
बढ़ता व्यापार — स्थानीय व दूरस्थ व्यापार मार्गों का विकास
सिक्कों का प्रचलन — विनिमय सरल; आर्थिक गतिविधियाँ तेज़

प्रमुख नगरमहाजनपदविशेषता
पाटलिपुत्रमगधमगध की नई राजधानी; गंगा-सोन संगम
वैशालीवज्जिगणतंत्र की राजधानी; द्वितीय बौद्ध संगीति
राजगिरमगधमगध की प्रथम राजधानी; पाँच पहाड़ियों से घिरा
कौशाम्बीवत्सव्यापारिक केंद्र; राजा उदयन
उज्जयिनीअवंतिपश्चिमी भारत का व्यापार केंद्र
तक्षशिलागंधारशिक्षा केंद्र; विश्वविद्यालय

🪙 आहत सिक्के (Punch-marked Coins):

चांदी और तांबा के सिक्के — भारत के सबसे पुराने सिक्के
इन पर विभिन्न चिह्न (पेड़, पहाड़, सूर्य, चंद्र) ठप्पे (punch) से अंकित
निश्चित भार मानक; व्यापार को सुगम बनाया

🏭 श्रेणी (Guilds):

व्यापारियों और शिल्पकारों के संगठन — बुनकर, कुम्हार, लोहार आदि की अलग-अलग श्रेणियाँ
सेठ/श्रेष्ठि = संगठन प्रमुख; वित्तीय लेन-देन, ऋण देना
श्रेणियाँ अपने सदस्यों के लिए नियम बनाती थीं; न्यायिक अधिकार भी प्राप्त थे

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16 महाजनपदों का उल्लेख: अंगुत्तर निकाय (बौद्ध) + भगवती सूत्र (जैन)
विश्व का पहला गणतंत्र: वैशाली (वज्जि/लिच्छवि)
मगध की पहली राजधानी: राजगृह; बाद में पाटलिपुत्र
सिकंदर और पोरस का युद्ध: हाइडेस्पीज़ (झेलम)
बुद्ध का महापरिनिर्वाण: कुशीनारा (मल्ल)
16 महाजनपदों में एकमात्र दक्षिणी: अश्मक

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