जैन धर्म — महावीर, त्रिरत्न और सम्प्रदाय

24 तीर्थंकर · त्रिरत्न · पंचमहाव्रत · दिगम्बर /श्वेताम्बर | UPSC GS पेपर I

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महावीर का जीवन

पहलूविवरण
जन्म599 ई.पू., वैशाली के पास कुण्डग्राम में
माता-पितासिद्धार्थ (पिता, क्षत्रिय) और त्रिशला (माता, लिच्छवि राजकुमारी)
बचपन का नामवर्धमान
विवाहयशोदा से; पुत्री अनोज्जा
त्याग30 वर्ष की आयु में गृहस्थ जीवन छोड़ा
तपस्या12 वर्षों की कठोर तपस्या; 29 वर्ष की अवस्था में दीक्षा
केवलज्ञान42 वर्ष की आयु में; जृम्भिकग्राम (बिहार) में ऋजुपालिका नदी तट पर
उपाधियाँमहावीर (महान नायक), जिन (विजेता), निर्ग्रन्थ (बंधनमुक्त)
उपदेशपाली की जगह प्राकृत भाषा में; जन-सामान्य को समझ आए
निर्वाण527 ई.पू., पावापुरी में; 72 वर्ष की आयु में

त्रिरत्न और पंचमहाव्रत

त्रिरत्न (मोक्ष के तीन मार्ग):

1. सम्यक् दर्शन — सही श्रद्धा (तीर्थंकरों में विश्वास)
2. सम्यक् ज्ञान — सही ज्ञान (शास्त्रों का ज्ञान)
3. सम्यक् आचरण — सही आचरण (पंचमहाव्रतों का पालन)

महाव्रतअर्थटिप्पणी
अहिंसाकिसी भी जीव को न मारनाजैन धर्म का सर्वोच्च सिद्धांत; मुँह पर पट्टी (मुखपट्टी)
सत्यझूठ न बोलनाहमेशा सच बोलना; अनावश्यक बातें न करना
अस्तेयचोरी न करनाकिसी की वस्तु बिना अनुमति न लेना
ब्रह्मचर्ययौन संयममहावीर ने जोड़ा (पार्श्वनाथ के 4 व्रतों में यह नहीं था)
अपरिग्रहसम्पत्ति न रखनासंसाधन पर आसक्ति न रखना

दिगम्बर और श्वेताम्बर — अंतर

पहलूदिगम्बर ("आकाश वस्त्र")श्वेताम्बर ("सफेद वस्त्र")
वस्त्रनग्न — वस्त्र त्याग मोक्ष के लिएसफेद वस्त्र पहनते हैं
महिलाएंमहिलाएं मोक्ष नहीं पा सकतींमहिलाएं मोक्ष पा सकती हैं
महावीर का विवाहमहावीर ने विवाह नहीं कियामहावीर ने विवाह किया (यशोदा से)
क्षेत्रदक्षिण भारत, कर्नाटकगुजरात, राजस्थान
मंदिर कलामूर्तियाँ नग्नमूर्तियाँ वस्त्र सहित
आगम (शास्त्र)खो गए / मान्यता नहीं45 आगम मानते हैं

24 तीर्थंकर — प्रमुख सूची

क्रमतीर्थंकरप्रतीकविशेष
1ऋषभदेव (आदिनाथ)वृषभ (बैल)प्रथम तीर्थंकर; भागवत पुराण में भी उल्लेख
2अजितनाथहाथी
22नेमिनाथ (अरिष्टनेमि)शंखकृष्ण के चचेरे भाई (जैन परंपरा)
23पार्श्वनाथसर्पमहावीर से 250 वर्ष पूर्व; चतुर्याम (4 व्रत — सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह); काशी (वाराणसी)
24महावीरसिंहवर्धमान; ज्ञातृक कुल; वैशाली; 72 वर्ष; पावापुरी में निर्वाण

जैन दर्शन — अनेकांतवाद और स्यादवाद

अनेकांतवाद (बहुपक्षीय सत्य):

सत्य के अनेक पक्ष होते हैं — एक ही वस्तु को भिन्न दृष्टिकोणों से देखा जा सकता है
प्रसिद्ध उदाहरण: 'अंधे और हाथी' की कहानी — प्रत्येक अंधा व्यक्ति हाथी के एक भाग को छूकर अलग निष्कर्ष निकालता है

स्यादवाद / सप्तभंगी (सात विधि कथन):

किसी भी कथन को 7 तरीकों से व्यक्त किया जा सकता है —
1. शायद है (स्यात् अस्ति)
2. शायद नहीं है (स्यात् नास्ति)
3. शायद है और नहीं भी है
4. शायद अवक्तव्य है (कहा नहीं जा सकता)
5. शायद है और अवक्तव्य है
6. शायद नहीं है और अवक्तव्य है
7. शायद है, नहीं है और अवक्तव्य है

कर्म सिद्धांत:

कर्म = सूक्ष्म पदार्थ (भौतिक कण) जो आत्मा से चिपकता है
तपस्या और संयम से कर्म-क्षय → मोक्ष प्राप्ति

जीव और अजीव:

जीव = चेतन तत्त्व (आत्मा युक्त)
अजीव = अचेतन तत्त्व — पुद्गल (पदार्थ), धर्म (गति का माध्यम), अधर्म (स्थिरता), आकाश, काल

कर्म का चक्र और मुक्ति:

आस्रव — कर्म का आत्मा में प्रवेश
बंध — कर्म का आत्मा से बंधन
संवर — नए कर्मों का प्रवेश रोकना
निर्जरा — पुराने कर्मों का क्षय (तपस्या द्वारा)
मोक्ष — सभी कर्मों से पूर्ण मुक्ति

जैन कला, स्थापत्य एवं साहित्य

स्थल / ग्रंथविवरण
दिलवाड़ा मंदिर (माउंट आबू, राजस्थान)11वीं-13वीं सदी; श्वेत संगमरमर; विमल वसही + लूण वसही; स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण
श्रवणबेलगोला (कर्नाटक)गोम्मटेश्वर बाहुबली की मूर्ति (17.4 मी); 981 CE; विश्व की सबसे बड़ी एकाश्म (मोनोलिथ) मूर्ति
एलोरा गुफाएँगुफा 30-34 — जैन गुफाएँ; छोटा कैलास; महाराष्ट्र
आगम (धर्मग्रंथ)12 अंग, 12 उपांग; श्वेताम्बर मान्यता; दिगम्बर मानते हैं कि मूल आगम लुप्त हो चुके हैं
जैन गणितसूर्यप्रज्ञप्ति, स्थानांग सूत्र; अनंत और संख्या सिद्धांत; शून्य की अवधारणा में महत्वपूर्ण योगदान

बौद्ध धर्म बनाम जैन धर्म — तुलना

विशेषताबौद्ध धर्मजैन धर्म
संस्थापकगौतम बुद्धमहावीर (24वें तीर्थंकर)
ईश्वरईश्वर में आस्था नहींईश्वर में आस्था नहीं
आत्माअनात्मवाद (कोई स्थायी आत्मा नहीं)आत्मवाद (आत्मा शाश्वत)
अहिंसामध्यम मार्गअत्यंत कठोर अहिंसा
वेदअवैदिकअवैदिक
तपस्यामध्यम मार्ग (न विलास, न कठोर तप)कठोर तपस्या (सल्लेखना/संथारा)
भाषापालिप्राकृत/अर्धमागधी
प्रमुख ग्रंथत्रिपिटकआगम
राजकीय संरक्षकअशोक, कनिष्क, हर्षचंद्रगुप्त मौर्य, खारवेल, अमोघवर्ष

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24वें तीर्थंकर: महावीर; 23वें: पार्श्वनाथ
1st तीर्थंकर: ऋषभदेव (आदिनाथ)
पहली जैन संगीति: पाटलिपुत्र, 300 ई.पू. (स्थूलभद्र)
दूसरी जैन संगीति: वल्लभी (गुजरात), 512 AD (देवर्धिगणि)
ब्रह्मचर्य: महावीर का जोड़ा सिद्धांत (पार्श्वनाथ के 4 में पाँचवाँ)
जैन कला: दिलवाड़ा मंदिर (माउंट आबू), खजुराहो
अनेकांतवाद: सत्य बहुआयामी है — जैन दर्शन का मूल

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