| पहलू | विवरण |
|---|---|
| जन्म | 599 ई.पू., वैशाली के पास कुण्डग्राम में |
| माता-पिता | सिद्धार्थ (पिता, क्षत्रिय) और त्रिशला (माता, लिच्छवि राजकुमारी) |
| बचपन का नाम | वर्धमान |
| विवाह | यशोदा से; पुत्री अनोज्जा |
| त्याग | 30 वर्ष की आयु में गृहस्थ जीवन छोड़ा |
| तपस्या | 12 वर्षों की कठोर तपस्या; 29 वर्ष की अवस्था में दीक्षा |
| केवलज्ञान | 42 वर्ष की आयु में; जृम्भिकग्राम (बिहार) में ऋजुपालिका नदी तट पर |
| उपाधियाँ | महावीर (महान नायक), जिन (विजेता), निर्ग्रन्थ (बंधनमुक्त) |
| उपदेश | पाली की जगह प्राकृत भाषा में; जन-सामान्य को समझ आए |
| निर्वाण | 527 ई.पू., पावापुरी में; 72 वर्ष की आयु में |
जैन धर्म — महावीर, त्रिरत्न और सम्प्रदाय
24 तीर्थंकर · त्रिरत्न · पंचमहाव्रत · दिगम्बर /श्वेताम्बर | UPSC GS पेपर I
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महावीर का जीवन
त्रिरत्न और पंचमहाव्रत
त्रिरत्न (मोक्ष के तीन मार्ग):
1. सम्यक् दर्शन — सही श्रद्धा (तीर्थंकरों में विश्वास)
2. सम्यक् ज्ञान — सही ज्ञान (शास्त्रों का ज्ञान)
3. सम्यक् आचरण — सही आचरण (पंचमहाव्रतों का पालन)
| महाव्रत | अर्थ | टिप्पणी |
|---|---|---|
| अहिंसा | किसी भी जीव को न मारना | जैन धर्म का सर्वोच्च सिद्धांत; मुँह पर पट्टी (मुखपट्टी) |
| सत्य | झूठ न बोलना | हमेशा सच बोलना; अनावश्यक बातें न करना |
| अस्तेय | चोरी न करना | किसी की वस्तु बिना अनुमति न लेना |
| ब्रह्मचर्य | यौन संयम | महावीर ने जोड़ा (पार्श्वनाथ के 4 व्रतों में यह नहीं था) |
| अपरिग्रह | सम्पत्ति न रखना | संसाधन पर आसक्ति न रखना |
दिगम्बर और श्वेताम्बर — अंतर
| पहलू | दिगम्बर ("आकाश वस्त्र") | श्वेताम्बर ("सफेद वस्त्र") |
|---|---|---|
| वस्त्र | नग्न — वस्त्र त्याग मोक्ष के लिए | सफेद वस्त्र पहनते हैं |
| महिलाएं | महिलाएं मोक्ष नहीं पा सकतीं | महिलाएं मोक्ष पा सकती हैं |
| महावीर का विवाह | महावीर ने विवाह नहीं किया | महावीर ने विवाह किया (यशोदा से) |
| क्षेत्र | दक्षिण भारत, कर्नाटक | गुजरात, राजस्थान |
| मंदिर कला | मूर्तियाँ नग्न | मूर्तियाँ वस्त्र सहित |
| आगम (शास्त्र) | खो गए / मान्यता नहीं | 45 आगम मानते हैं |
24 तीर्थंकर — प्रमुख सूची
| क्रम | तीर्थंकर | प्रतीक | विशेष |
|---|---|---|---|
| 1 | ऋषभदेव (आदिनाथ) | वृषभ (बैल) | प्रथम तीर्थंकर; भागवत पुराण में भी उल्लेख |
| 2 | अजितनाथ | हाथी | — |
| 22 | नेमिनाथ (अरिष्टनेमि) | शंख | कृष्ण के चचेरे भाई (जैन परंपरा) |
| 23 | पार्श्वनाथ | सर्प | महावीर से 250 वर्ष पूर्व; चतुर्याम (4 व्रत — सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह); काशी (वाराणसी) |
| 24 | महावीर | सिंह | वर्धमान; ज्ञातृक कुल; वैशाली; 72 वर्ष; पावापुरी में निर्वाण |
जैन दर्शन — अनेकांतवाद और स्यादवाद
अनेकांतवाद (बहुपक्षीय सत्य):
→ सत्य के अनेक पक्ष होते हैं — एक ही वस्तु को भिन्न दृष्टिकोणों से देखा जा सकता है
→ प्रसिद्ध उदाहरण: 'अंधे और हाथी' की कहानी — प्रत्येक अंधा व्यक्ति हाथी के एक भाग को छूकर अलग निष्कर्ष निकालता है
स्यादवाद / सप्तभंगी (सात विधि कथन):
→ किसी भी कथन को 7 तरीकों से व्यक्त किया जा सकता है —
1. शायद है (स्यात् अस्ति)
2. शायद नहीं है (स्यात् नास्ति)
3. शायद है और नहीं भी है
4. शायद अवक्तव्य है (कहा नहीं जा सकता)
5. शायद है और अवक्तव्य है
6. शायद नहीं है और अवक्तव्य है
7. शायद है, नहीं है और अवक्तव्य है
कर्म सिद्धांत:
→ कर्म = सूक्ष्म पदार्थ (भौतिक कण) जो आत्मा से चिपकता है
→ तपस्या और संयम से कर्म-क्षय → मोक्ष प्राप्ति
जीव और अजीव:
→ जीव = चेतन तत्त्व (आत्मा युक्त)
→ अजीव = अचेतन तत्त्व — पुद्गल (पदार्थ), धर्म (गति का माध्यम), अधर्म (स्थिरता), आकाश, काल
कर्म का चक्र और मुक्ति:
→ आस्रव — कर्म का आत्मा में प्रवेश
→ बंध — कर्म का आत्मा से बंधन
→ संवर — नए कर्मों का प्रवेश रोकना
→ निर्जरा — पुराने कर्मों का क्षय (तपस्या द्वारा)
→ मोक्ष — सभी कर्मों से पूर्ण मुक्ति
जैन कला, स्थापत्य एवं साहित्य
| स्थल / ग्रंथ | विवरण |
|---|---|
| दिलवाड़ा मंदिर (माउंट आबू, राजस्थान) | 11वीं-13वीं सदी; श्वेत संगमरमर; विमल वसही + लूण वसही; स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण |
| श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) | गोम्मटेश्वर बाहुबली की मूर्ति (17.4 मी); 981 CE; विश्व की सबसे बड़ी एकाश्म (मोनोलिथ) मूर्ति |
| एलोरा गुफाएँ | गुफा 30-34 — जैन गुफाएँ; छोटा कैलास; महाराष्ट्र |
| आगम (धर्मग्रंथ) | 12 अंग, 12 उपांग; श्वेताम्बर मान्यता; दिगम्बर मानते हैं कि मूल आगम लुप्त हो चुके हैं |
| जैन गणित | सूर्यप्रज्ञप्ति, स्थानांग सूत्र; अनंत और संख्या सिद्धांत; शून्य की अवधारणा में महत्वपूर्ण योगदान |
बौद्ध धर्म बनाम जैन धर्म — तुलना
| विशेषता | बौद्ध धर्म | जैन धर्म |
|---|---|---|
| संस्थापक | गौतम बुद्ध | महावीर (24वें तीर्थंकर) |
| ईश्वर | ईश्वर में आस्था नहीं | ईश्वर में आस्था नहीं |
| आत्मा | अनात्मवाद (कोई स्थायी आत्मा नहीं) | आत्मवाद (आत्मा शाश्वत) |
| अहिंसा | मध्यम मार्ग | अत्यंत कठोर अहिंसा |
| वेद | अवैदिक | अवैदिक |
| तपस्या | मध्यम मार्ग (न विलास, न कठोर तप) | कठोर तपस्या (सल्लेखना/संथारा) |
| भाषा | पालि | प्राकृत/अर्धमागधी |
| प्रमुख ग्रंथ | त्रिपिटक | आगम |
| राजकीय संरक्षक | अशोक, कनिष्क, हर्ष | चंद्रगुप्त मौर्य, खारवेल, अमोघवर्ष |
त्वरित पुनरीक्षण
✅ प्रारंभिक परीक्षा के लिए अनिवार्य
→ 24वें तीर्थंकर: महावीर; 23वें: पार्श्वनाथ
→ 1st तीर्थंकर: ऋषभदेव (आदिनाथ)
→ पहली जैन संगीति: पाटलिपुत्र, 300 ई.पू. (स्थूलभद्र)
→ दूसरी जैन संगीति: वल्लभी (गुजरात), 512 AD (देवर्धिगणि)
→ ब्रह्मचर्य: महावीर का जोड़ा सिद्धांत (पार्श्वनाथ के 4 में पाँचवाँ)
→ जैन कला: दिलवाड़ा मंदिर (माउंट आबू), खजुराहो
→ अनेकांतवाद: सत्य बहुआयामी है — जैन दर्शन का मूल
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