→ समय काल: ~3300 – 1300 ई.पू. (चरम काल ~2600–1900 ई.पू.)
→ खोज: 1921 में दयाराम साहनी ने हड़प्पा और 1922 में R.D. बनर्जी ने मोहनजोदड़ो की खोज की
→ विस्तार: लगभग 12.5 लाख वर्ग किमी — मेसोपोटामिया और मिस्र की सभ्यताओं से बड़ी
→ लिपि: अभी तक पढ़ी नहीं गई (भाव-चित्रात्मक लिपि; दाएं से बाएं लिखी जाती थी)
→ चरम सीमाएं: उत्तर — मंडा (J&K); दक्षिण — दाइमाबाद (महाराष्ट्र); पूर्व — आलमगीरपुर (UP); पश्चिम — सुत्कागेंडोर (बलूचिस्तान)
→ स्मृति सूत्र: "मंडा शाउट्स ईस्ट-वेस्ट" — मंडा, दाइमाबाद, आलमगीरपुर, सुत्कागेंडोर
सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता)
नगर नियोजन · प्रमुख स्थल · व्यापार · पतन | UPSC GS पेपर I
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सिंधु घाटी सभ्यता — परिचय
प्रमुख स्थल और उनकी विशेषताएं
| स्थल | स्थान | प्रमुख खोजें/विशेषताएं |
|---|---|---|
| हड़प्पा | पंजाब (पाकिस्तान, रावी नदी) | पहला खोजा गया स्थल; अनाज भंडारण; R-37 कब्रिस्तान; 'H' कब्रिस्तान (बाद में) |
| मोहनजोदड़ो | सिंध (पाकिस्तान, सिंधु नदी) | 'मृतकों की पहाड़ी'; विशाल स्नानागार; सभाभवन; पुजारी-राजा की मूर्ति; नर्तकी की कांस्य मूर्ति |
| धोलावीरा | गुजरात (कच्छ का रण) | 3-भागों में विभाजित नगर; विशाल जल-संग्रह; पत्थर-निर्मित; अनोखा स्टेडियम |
| लोथल | गुजरात (भोगवा नदी) | भारत का पहला प्राचीन बंदरगाह; फारस की खाड़ी के साथ व्यापार; चावल की खेती; मनकों का कारखाना |
| कालीबंगा | राजस्थान (घग्घर नदी) | 'काले चूड़ियाँ'; जुते हुए खेत के प्रमाण; अग्नि वेदी; दो-स्तरीय नगर |
| बनवाली | हरियाणा (घग्घर) | अच्छी गणनाओं वाला आयोजन; जौ की खेती; सोने के मनके; सुडौल बर्तन |
| चन्हूदड़ो | सिंध (पाकिस्तान) | इकमात्र बिना 'दुर्ग' वाला शहर; मनकों की फैक्ट्री; लिपस्टिक का साक्ष्य |
| सुरकोटदा | गुजरात | घोड़े की हड्डियों का पहला प्रमाण |
| राखीगढ़ी | हरियाणा | भारत का सबसे बड़ा IVC स्थल (क्षेत्रफल में) |
| दाइमाबाद | महाराष्ट्र | सबसे दक्षिणी स्थल; कांस्य रथ और बैल |
| रोपड़ | पंजाब (सतलज) | भारत में स्वतंत्रता के बाद खुदाई किया पहला IVC स्थल |
| आलमगीरपुर | UP | सबसे पूर्वी स्थल; देर से हड़प्पाई |
| कोटदीजी | सिंध | प्री-हड़प्पा और हड़प्पा दोनों परतें |
| सुत्कागेंडोर | बलूचिस्तान समुद्र तट | सबसे पश्चिमी स्थल; अरब व्यापार अड्डा |
नगर नियोजन
→ ग्रिड पैटर्न — सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं
→ दो-भाग: पश्चिमी टीला (गढ़/दुर्ग) + पूर्वी टीला (निचला शहर)
→ भूमिगत जल-निकासी — ईंट से बनी नालियाँ; सफाई पर विशेष ध्यान
→ मानकीकृत ईंटें — आकार का अनुपात 1:2:4 (ऊंचाई:चौड़ाई:लंबाई)
→ विशाल स्नानागार (मोहनजोदड़ो) — 12×7 मीटर; जलरोधी फर्श; धार्मिक महत्व माना जाता है
→ घरों में आंगन + शौचालय; कुछ में दो मंजिलें
→ कोई महल/मंदिर नहीं मिला — पुजारी-राजा जैसा शासन माना जाता है
पतन के कारण — विभिन्न सिद्धांत
| सिद्धांत | प्रतिपादक | साक्ष्य/कमजोरी |
|---|---|---|
| आर्य आक्रमण | मार्टिमर व्हीलर | कंकाल, नगर परित्याग; लेकिन अब अधिकांश इतिहासकार इसे अस्वीकार करते हैं |
| बाढ़/प्राकृतिक आपदा | माशेल, रेकेस | मोहनजोदड़ो में बाढ़ के साक्ष्य; पर एक साथ सभी स्थलों में नहीं |
| जलवायु परिवर्तन / सूखा | केनेडी, पोसेल (लोकप्रिय) | घग्घर-हाकरा नदी के सूखने के साक्ष्य; सबसे व्यापक रूप से स्वीकृत |
| नदी मार्ग परिवर्तन | लैम्ब्रिक | सिंधु नदी का मार्ग बदलना |
| अत्यधिक वनों की कटाई | — | ईंटें पकाने के लिए लकड़ी जलाना → मरुस्थलीकरण |
| व्यापार में व्यवधान | — | मेसोपोटामिया के रिकॉर्ड में IVC व्यापार का उल्लेख ~1900 ई.पू. के बाद बंद |
| टेक्टोनिक गतिविधि | — | भूकंप से नदी के मार्ग बदलना |
⚠️ परीक्षा का जाल: IVC की लिपि अभी तक नहीं पढ़ी गई है — इसे "द्रविड़ भाषा" या "संस्कृत" बताने वाले विकल्प गलत हैं।
अर्थव्यवस्था एवं व्यापार
कृषि
→ मुख्य फसलें: गेहूँ, जौ, कपास (विश्व में सबसे पहले कपास उगाने वाली सभ्यता!), मटर, तिल, सरसों
→ कालीबंगन (राजस्थान) — जुते हुए खेत के सबसे पुराने साक्ष्य; आड़ी-तिरछी (cross-ploughed) जुताई
→ चावल की खेती — लोथल और रंगपुर से प्रमाण मिले हैं
व्यापार
→ मेसोपोटामिया (सुमेर) के साथ व्यापक व्यापार — सुमेरियन रिकॉर्ड में सिंधु सभ्यता को 'मेलुहा' कहा गया
→ बंदरगाह — लोथल (गुजरात) में गोदीबाड़ा (dockyard) मिला; यह प्राचीन विश्व का सबसे पुराना ज्ञात बंदरगाह है
→ व्यापारिक वस्तुएं: कपास, मनके, हाथीदांत, लकड़ी → मेसोपोटामिया; सोना, चांदी, टिन ← बाहर से आयात
→ आंतरिक व्यापार: बैलगाड़ी और नावों का प्रयोग
माप-तोल और बाट
→ बाट: 16 या उसके गुणक (1, 2, 4, 8, 16, 32, 64…) — अत्यंत मानकीकृत प्रणाली
→ हाथीदांत का पैमाना (स्केल) — मोहनजोदड़ो से प्राप्त
→ बाट अधिकतर चर्ट (एक प्रकार का पत्थर) से बने; घनाकार आकृति
मुहरें
→ मुख्य सामग्री: स्टीटाइट (सेलखड़ी)
→ 2000+ मुहरें प्राप्त; अधिकांश आकार में वर्गाकार
→ पशुपति मुहर — योगमुद्रा में बैठी आकृति (शिव? प्रोटो-शिव); चारों ओर पशु
→ यूनिकॉर्न बैल (एक-सींग वाला बैल) — सबसे सामान्य चित्रण
→ मुहरों का उपयोग: व्यापार में पहचान, पैकेजिंग पर सील, संभवतः ताबीज़
शिल्प एवं कला
→ मनके बनाना — चन्हूदड़ो प्रमुख केंद्र; कार्नेलियन, लैपिस लाज़ुली, जैस्पर आदि से निर्मित
→ कांस्य कला — नर्तकी की मूर्ति (Dancing Girl) — मोहनजोदड़ो से प्राप्त; लॉस्ट-वैक्स विधि से निर्मित
→ मृद्भांड (मिट्टी के बर्तन) — लाल और काले रंग की चित्रकारी; ज्यामितीय और प्राकृतिक डिज़ाइन
→ पुजारी-राजा की मूर्ति (Priest-King) — मोहनजोदड़ो; तिपतिया पत्ती के डिज़ाइन वाला वस्त्र
धर्म एवं शव-संस्कार
धार्मिक आस्थाएं
→ मातृदेवी पूजा: अनेक मिट्टी की मूर्तियाँ प्राप्त; प्रजनन (fertility) से जुड़ी आस्था
→ पशुपति मुहर: योगमुद्रा में बैठी आकृति; चारों ओर पशु — हाथी, बाघ, गैंडा, भैंसा; दो हिरण पैरों के नीचे; इसे प्रोटो-शिव माना जाता है
→ वृक्ष पूजा: पीपल के वृक्ष मुहरों पर दर्शाए गए हैं; वृक्ष-आत्मा (tree-spirit) की अवधारणा
→ लिंग और योनि जैसी पत्थर की संरचनाएँ — संभवतः शिव पूजा का प्रारंभिक रूप
→ जल/स्नान को विशेष धार्मिक महत्व — विशाल स्नानागार इसका प्रमाण
→ पशु पूजा: बैल (वृषभ) सबसे पवित्र; कूबड़ वाला बैल मुहरों पर सर्वाधिक
शव-संस्कार (अंतिम संस्कार)
→ तीन प्रकार के शव-संस्कार प्रचलित थे:
1. पूर्ण शवाधान (Complete Burial) — शव को सीधे दफनाना; सबसे सामान्य विधि
2. आंशिक शवाधान (Fractional/Partial Burial) — शव को पहले खुले में रखना, फिर हड्डियाँ एकत्र कर दफनाना
3. दाह-संस्कार + कलश शवाधान (Cremation + Urn Burial) — शव जलाकर राख को कलश में रखना
→ शवों के साथ मिट्टी के बर्तन, अनाज, आभूषण रखे जाते थे (पारलौकिक जीवन में विश्वास?)
→ H-कब्रिस्तान (हड़प्पा) — उत्तर-हड़प्पा काल; कलश शवाधान का प्रमाण
⚠️ ध्यान दें: सिंधु सभ्यता में कोई भव्य मंदिर नहीं मिला; कोई राजमहल नहीं मिला। शासन/सत्ता की संरचना अज्ञात है — राजतंत्र था या गणतंत्र, यह विवाद का विषय है।
लिपि एवं अनसुलझे रहस्य
सिंधु लिपि
→ लिपि: चित्रात्मक (pictographic) प्रकृति की
→ कुल 400+ चिह्न ज्ञात; यह वर्णमाला नहीं है (बहुत अधिक चिह्न)
→ लिखने की दिशा: दाएँ से बाएँ
→ अभी तक नहीं पढ़ी जा सकी — विश्व की सबसे बड़ी अनसुलझी लिपियों में से एक
→ सबसे लंबा अभिलेख: केवल 26 चिह्न; अधिकांश मुहरों पर 5 से कम चिह्न
→ भाषा की पहचान: कुछ विद्वान द्रविड़ परिवार से जोड़ते हैं, कुछ इंडो-आर्यन से — कोई निश्चित उत्तर नहीं
अनसुलझे प्रश्न
→ लिपि का रहस्य — क्या कभी पढ़ी जा सकेगी? बिना 'रोसेटा स्टोन' जैसी कुंजी के कठिन
→ शासन प्रणाली — कौन शासक था? राजा, पुरोहित, व्यापारी वर्ग, या सामूहिक शासन?
→ सटीक पतन का कारण — जलवायु परिवर्तन सबसे मान्य, लेकिन अकेला कारण पर्याप्त नहीं
→ 'विशाल स्नानागार' का उद्देश्य — धार्मिक अनुष्ठान? सामाजिक स्नान? राजकीय समारोह?
→ सैन्य शक्ति — कोई स्पष्ट हथियार/किलेबंदी नहीं; इतना विशाल साम्राज्य बिना सेना के कैसे?
→ सिंधु-सरस्वती बहस — क्या यह सरस्वती नदी की सभ्यता थी? घग्घर-हाकरा = वैदिक सरस्वती?
💡 UPSC टिप: सिंधु लिपि से जुड़े प्रश्न अक्सर आते हैं। याद रखें — लिपि पढ़ी नहीं गई, भाषा अज्ञात है, और कोई भी दावा (द्रविड़/संस्कृत) अप्रमाणित है।
त्वरित पुनरीक्षण
✅ प्रारंभिक परीक्षा के लिए अनिवार्य
→ हड़प्पा की खोज: दयाराम साहनी, 1921
→ मोहनजोदड़ो की खोज: R.D. बनर्जी, 1922
→ भारत का सबसे बड़ा IVC स्थल: राखीगढ़ी (हरियाणा)
→ पहला बंदरगाह: लोथल (गुजरात)
→ जुते हुए खेत: कालीबंगा
→ घोड़े की हड्डियाँ: सुरकोटदा
→ विशाल स्नानागार: मोहनजोदड़ो
→ लिपि: अभी तक अपठनीय; दाएं से बाएं
→ पतन का सर्वाधिक मान्य कारण: जलवायु परिवर्तन/सूखा
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