जिस काल का कोई लिखित साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, उसे प्रागैतिहासिक काल कहते हैं। इस काल की जानकारी पुरातात्विक खुदाइयों, पत्थर के औजारों, गुफा-चित्रों और हड्डियों से मिलती है। इतिहासकार इसे उपकरण संस्कृति (Tool Culture) के आधार पर वर्गीकृत करते हैं।
प्रागैतिहासिक भारत — पाषाण काल से ताम्र-पाषाण काल
पुरापाषाण · मध्यपाषाण · नवपाषाण · ताम्र-पाषाण | UPSC GS पेपर I
KnowledgeKnot में आपका स्वागत है! इसे अपने मित्रों के साथ साझा करें और बार-बार पढ़ें। आपका समर्थन हमें और सामग्री बनाने के लिए प्रेरित करता है।
प्रागैतिहास क्या होता है?
चार प्रमुख काल
| काल | अनुमानित समय | उपकरण | जीवन शैली | प्रमुख स्थल |
|---|---|---|---|---|
| पुरापाषाण काल (Palaeolithic) | 25 लाख ई.पू. – 10,000 ई.पू. | कच्चे पत्थर के हाथ-कुल्हाड़ी; खंडक (Chopper); क्लीवर | खानाबदोश शिकारी-संग्राहक; आग का प्रयोग; कोई खेती नहीं | भीमबेटका (MP), हुंसगी (कर्नाटक), सोन घाटी |
| मध्यपाषाण काल (Mesolithic) | 10,000 – 6,000 ई.पू. | सूक्ष्मास्म (Microliths); छोटे-तीखे पत्थर | अर्ध-खानाबदोश; पशुपालन शुरू; मछली पकड़ना | बागोर (राजस्थान), आदमगढ़ (MP), लंघनाज (गुजरात) |
| नवपाषाण काल (Neolithic) | 6,000 – 1,000 ई.पू. | पॉलिश किए पत्थर के औजार; हड्डी व लकड़ी | स्थायी ग्राम; खेती; मिट्टी के बर्तन; जानवर पालते थे | मेहरगढ़ (सबसे पुराना), बुर्जहोम (कश्मीर), चिरांद (बिहार) |
| ताम्र-पाषाण काल (Chalcolithic) | 3,000 – 700 ई.पू. | तांबे + पत्थर के औजार; चित्रित मिट्टी के बर्तन | गाँव समुदाय; व्यापार; धर्म प्रारम्भ | अहार (राजस्थान), मालवा, जोर्वे (महाराष्ट्र), नवदातोली |
नवपाषाण काल के प्रमुख स्थल
| स्थल | स्थान | विशेषता |
|---|---|---|
| मेहरगढ़ | बलूचिस्तान (पाकिस्तान) | भारत का सबसे पुराना नवपाषाणिक स्थल (~7000 ई.पू.); गेहूँ व जौ की खेती के प्रमाण |
| बुर्जहोम | कश्मीर | गड्ढे में घर; मालिक के साथ कुत्ते की कब्र; हड्डी के हार्पून |
| चिरांड | बिहार (सारण जिला) | हड्डी के औजारों के लिए प्रसिद्ध |
| मास्की | कर्नाटक | अशोक के शिलालेख में 'अशोक' नाम का पहला स्पष्ट उल्लेख; नवपाषाणिक पुरातत्व भी |
| कोलडिह्वा | UP (इलाहाबाद) | चावल की खेती के सबसे पुराने साक्ष्य (लगभग 7000-6000 ई.पू.) |
| हल्लूर | कर्नाटक | दक्षिण भारत का नवपाषाण काल; काले-लाल मिट्टी के बर्तन |
| उत्नूर | आंध्र प्रदेश | प्रसिद्ध 'ऐश माउंड्स' (राख के टीले) — रात को पशु बाड़े में आग का प्रमाण |
ताम्र-पाषाण संस्कृतियाँ
| संस्कृति | क्षेत्र | विशेषता |
|---|---|---|
| अहार (बनास) संस्कृति | राजस्थान | काले-लाल मिट्टी के बर्तन; सफेद रेखाओं का डिजाइन; तांबे की कुल्हाड़ियाँ |
| कायथा संस्कृति | मालवा (MP) | चित्रित लाल मिट्टी के बर्तन; तांबे के आभूषण |
| मालवा संस्कृति | MP (नर्मदा क्षेत्र) | भारत में सबसे बड़े विस्तारित ताम्र-पाषाण स्थल |
| जोर्वे संस्कृति | महाराष्ट्र | नवदातोली, चांदोली, इनामगाँव; घरों के फर्श पर कब्रें; कपास की खेती |
| सवालदा संस्कृति | महाराष्ट्र | जोर्वे से पुरानी; खुरदरे मिट्टी के बर्तन |
| प्रभास संस्कृति | गुजरात | देर से हड़प्पाई और ताम्र-पाषाण का मिश्रण |
| ओचर कोलर्ड मृद्भांड (OCP) | गंगा-यमुना दोआब | गेरुए रंग के मिट्टी के बर्तन; शुरुआती ताम्र-पाषाण काल |
🧠 स्मृति सूत्र (ताम्र-पाषाण संस्कृतियाँ):
"अ का मा जो स प ओ" — अहार, कायथा, मालवा, जोर्वे, सवालदा, प्रभास, ओCP
भीमबेटका और शैल चित्र
🏔️ भीमबेटका (मध्य प्रदेश)
→ UNESCO विश्व धरोहर स्थल — मध्य प्रदेश के रायसेन ज़िले में स्थित
→ 500 से अधिक शैलाश्रय (Rock Shelters) खोजे गए हैं
→ चित्र 30,000+ वर्ष पुराने — पुरापाषाण काल से मध्यकाल तक की निरंतरता
🎨 शैल चित्रों के विषय एवं रंग
→ शिकार के दृश्य — समूह में शिकार, जाल व भालों का उपयोग
→ नृत्य एवं सामूहिक जीवन — उत्सव, अनुष्ठान, दैनिक गतिविधियाँ
→ पशु-चित्रण — बाइसन, हाथी, बारहसिंगा, तेंदुआ, जंगली सूअर
→ प्रमुख रंग: लाल और सफ़ेद; गेरू (Ochre) का व्यापक उपयोग
→ हरा और पीला रंग भी कुछ स्थानों पर मिलता है
📌 अन्य महत्वपूर्ण शैल-चित्र स्थल
→ जोगीमारा गुफा (छत्तीसगढ़) — प्राचीनतम गुफा-रंगशाला; प्राकृत भाषा में अभिलेख
→ एडक्कल गुफाएँ (केरल) — दक्षिण भारत के सबसे पुराने शैल चित्र; नवपाषाण काल
महापाषाण संस्कृति (Megalithic)
⏳ काल एवं पहचान
→ काल: 1000 ई.पू. – 200 ई. (लगभग); लोहयुग से सीधा संबंध
→ काले और लाल मृद्भांड (Black and Red Ware — BRW) इस संस्कृति की प्रमुख पहचान
→ लोहे के औज़ार, हथियार और कृषि उपकरण बड़ी संख्या में प्राप्त
⚱️ प्रमुख शव-संस्कार प्रथाएँ
→ सिस्ट (Cist) — पत्थर की पेटी में शव दफनाना
→ डोलमेन (Dolmen) — बड़े पत्थरों से बनी मेज़ जैसी संरचना
→ मेनहिर (Menhir) — खड़ा पत्थर; स्मारक के रूप में
→ शववाहक (Urn Burial) — मिट्टी के बड़े घड़ों में शव रखना
📍 प्रमुख क्षेत्र एवं स्थल
→ मुख्य क्षेत्र: दक्षिण भारत — केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश
→ ब्रह्मगिरि (कर्नाटक) — व्हीलर द्वारा उत्खनन; महापाषाण + लौहयुग स्तर
→ अदिच्चनल्लूर (तमिलनाडु) — बड़ी संख्या में शव-कलश (Urn Burials) प्राप्त
→ हल्लूर (कर्नाटक) — नवपाषाण से महापाषाण काल तक की निरंतरता
त्वरित पुनरीक्षण
✅ प्रारंभिक परीक्षा के लिए अनिवार्य
→ सबसे पुराना नवपाषाण स्थल: मेहरगढ़ (~7000 ई.पू.)
→ चावल की खेती का सबसे पुराना साक्ष्य: कोलडिह्वा (UP)
→ मालिक के साथ कुत्ते की कब्र: बुर्जहोम (कश्मीर)
→ गड्ढे में घर: बुर्जहोम
→ हड्डी के औजारों का केंद्र: चिरांड (बिहार)
→ भीमबेटका: पुरापाषाण काल की गुफा-चित्रकारी (MP); UNESCO विश्व धरोहर
→ राख के टीले: उत्नूर (AP) — नवपाषाण पशुपालन का प्रमाण
→ ताम्र-पाषाण काल में शवों को घर में ही दफनाने की परंपरा: जोर्वे संस्कृति
→ भीमबेटका में 500+ शैलाश्रय; गेरू (Ochre) रंग प्रमुख
→ महापाषाण संस्कृति की पहचान: काले-लाल मृद्भांड (BRW)
→ अदिच्चनल्लूर (तमिलनाडु): शव-कलश दफन (Urn Burial) का प्रमुख स्थल
→ जोगीमारा गुफा (छत्तीसगढ़): प्राचीनतम गुफा-रंगशाला
📖 आगे पढ़ें
Suggetested Articles