प्रागैतिहासिक भारत — पाषाण काल से ताम्र-पाषाण काल

पुरापाषाण · मध्यपाषाण · नवपाषाण · ताम्र-पाषाण | UPSC GS पेपर I

KnowledgeKnot में आपका स्वागत है! इसे अपने मित्रों के साथ साझा करें और बार-बार पढ़ें। आपका समर्थन हमें और सामग्री बनाने के लिए प्रेरित करता है।

📋 प्राचीन इतिहास श्रृंखला

← प्राचीन इतिहास सूची  |  सिंधु घाटी सभ्यता →

🌐 Read in English

प्रागैतिहास क्या होता है?

जिस काल का कोई लिखित साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, उसे प्रागैतिहासिक काल कहते हैं। इस काल की जानकारी पुरातात्विक खुदाइयों, पत्थर के औजारों, गुफा-चित्रों और हड्डियों से मिलती है। इतिहासकार इसे उपकरण संस्कृति (Tool Culture) के आधार पर वर्गीकृत करते हैं।

चार प्रमुख काल

कालअनुमानित समयउपकरणजीवन शैलीप्रमुख स्थल
पुरापाषाण काल (Palaeolithic)25 लाख ई.पू. – 10,000 ई.पू.कच्चे पत्थर के हाथ-कुल्हाड़ी; खंडक (Chopper); क्लीवरखानाबदोश शिकारी-संग्राहक; आग का प्रयोग; कोई खेती नहींभीमबेटका (MP), हुंसगी (कर्नाटक), सोन घाटी
मध्यपाषाण काल (Mesolithic)10,000 – 6,000 ई.पू.सूक्ष्मास्म (Microliths); छोटे-तीखे पत्थरअर्ध-खानाबदोश; पशुपालन शुरू; मछली पकड़नाबागोर (राजस्थान), आदमगढ़ (MP), लंघनाज (गुजरात)
नवपाषाण काल (Neolithic)6,000 – 1,000 ई.पू.पॉलिश किए पत्थर के औजार; हड्डी व लकड़ीस्थायी ग्राम; खेती; मिट्टी के बर्तन; जानवर पालते थेमेहरगढ़ (सबसे पुराना), बुर्जहोम (कश्मीर), चिरांद (बिहार)
ताम्र-पाषाण काल (Chalcolithic)3,000 – 700 ई.पू.तांबे + पत्थर के औजार; चित्रित मिट्टी के बर्तनगाँव समुदाय; व्यापार; धर्म प्रारम्भअहार (राजस्थान), मालवा, जोर्वे (महाराष्ट्र), नवदातोली

नवपाषाण काल के प्रमुख स्थल

स्थलस्थानविशेषता
मेहरगढ़बलूचिस्तान (पाकिस्तान)भारत का सबसे पुराना नवपाषाणिक स्थल (~7000 ई.पू.); गेहूँ व जौ की खेती के प्रमाण
बुर्जहोमकश्मीरगड्ढे में घर; मालिक के साथ कुत्ते की कब्र; हड्डी के हार्पून
चिरांडबिहार (सारण जिला)हड्डी के औजारों के लिए प्रसिद्ध
मास्कीकर्नाटकअशोक के शिलालेख में 'अशोक' नाम का पहला स्पष्ट उल्लेख; नवपाषाणिक पुरातत्व भी
कोलडिह्वाUP (इलाहाबाद)चावल की खेती के सबसे पुराने साक्ष्य (लगभग 7000-6000 ई.पू.)
हल्लूरकर्नाटकदक्षिण भारत का नवपाषाण काल; काले-लाल मिट्टी के बर्तन
उत्नूरआंध्र प्रदेशप्रसिद्ध 'ऐश माउंड्स' (राख के टीले) — रात को पशु बाड़े में आग का प्रमाण

ताम्र-पाषाण संस्कृतियाँ

संस्कृतिक्षेत्रविशेषता
अहार (बनास) संस्कृतिराजस्थानकाले-लाल मिट्टी के बर्तन; सफेद रेखाओं का डिजाइन; तांबे की कुल्हाड़ियाँ
कायथा संस्कृतिमालवा (MP)चित्रित लाल मिट्टी के बर्तन; तांबे के आभूषण
मालवा संस्कृतिMP (नर्मदा क्षेत्र)भारत में सबसे बड़े विस्तारित ताम्र-पाषाण स्थल
जोर्वे संस्कृतिमहाराष्ट्रनवदातोली, चांदोली, इनामगाँव; घरों के फर्श पर कब्रें; कपास की खेती
सवालदा संस्कृतिमहाराष्ट्रजोर्वे से पुरानी; खुरदरे मिट्टी के बर्तन
प्रभास संस्कृतिगुजरातदेर से हड़प्पाई और ताम्र-पाषाण का मिश्रण
ओचर कोलर्ड मृद्भांड (OCP)गंगा-यमुना दोआबगेरुए रंग के मिट्टी के बर्तन; शुरुआती ताम्र-पाषाण काल

🧠 स्मृति सूत्र (ताम्र-पाषाण संस्कृतियाँ):

"अ का मा जो स प ओ"हार, कायथा, मालवा, जोर्वे, वालदा, ्रभास, CP

भीमबेटका और शैल चित्र

🏔️ भीमबेटका (मध्य प्रदेश)

UNESCO विश्व धरोहर स्थल — मध्य प्रदेश के रायसेन ज़िले में स्थित
500 से अधिक शैलाश्रय (Rock Shelters) खोजे गए हैं
चित्र 30,000+ वर्ष पुराने — पुरापाषाण काल से मध्यकाल तक की निरंतरता

🎨 शैल चित्रों के विषय एवं रंग

शिकार के दृश्य — समूह में शिकार, जाल व भालों का उपयोग
नृत्य एवं सामूहिक जीवन — उत्सव, अनुष्ठान, दैनिक गतिविधियाँ
पशु-चित्रण — बाइसन, हाथी, बारहसिंगा, तेंदुआ, जंगली सूअर
प्रमुख रंग: लाल और सफ़ेद; गेरू (Ochre) का व्यापक उपयोग
हरा और पीला रंग भी कुछ स्थानों पर मिलता है

📌 अन्य महत्वपूर्ण शैल-चित्र स्थल

जोगीमारा गुफा (छत्तीसगढ़) — प्राचीनतम गुफा-रंगशाला; प्राकृत भाषा में अभिलेख
एडक्कल गुफाएँ (केरल) — दक्षिण भारत के सबसे पुराने शैल चित्र; नवपाषाण काल

महापाषाण संस्कृति (Megalithic)

⏳ काल एवं पहचान

काल: 1000 ई.पू. – 200 ई. (लगभग); लोहयुग से सीधा संबंध
काले और लाल मृद्भांड (Black and Red Ware — BRW) इस संस्कृति की प्रमुख पहचान
लोहे के औज़ार, हथियार और कृषि उपकरण बड़ी संख्या में प्राप्त

⚱️ प्रमुख शव-संस्कार प्रथाएँ

सिस्ट (Cist) — पत्थर की पेटी में शव दफनाना
डोलमेन (Dolmen) — बड़े पत्थरों से बनी मेज़ जैसी संरचना
मेनहिर (Menhir) — खड़ा पत्थर; स्मारक के रूप में
शववाहक (Urn Burial) — मिट्टी के बड़े घड़ों में शव रखना

📍 प्रमुख क्षेत्र एवं स्थल

मुख्य क्षेत्र: दक्षिण भारत — केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश
ब्रह्मगिरि (कर्नाटक) — व्हीलर द्वारा उत्खनन; महापाषाण + लौहयुग स्तर
अदिच्चनल्लूर (तमिलनाडु) — बड़ी संख्या में शव-कलश (Urn Burials) प्राप्त
हल्लूर (कर्नाटक) — नवपाषाण से महापाषाण काल तक की निरंतरता

त्वरित पुनरीक्षण

✅ प्रारंभिक परीक्षा के लिए अनिवार्य

सबसे पुराना नवपाषाण स्थल: मेहरगढ़ (~7000 ई.पू.)
चावल की खेती का सबसे पुराना साक्ष्य: कोलडिह्वा (UP)
मालिक के साथ कुत्ते की कब्र: बुर्जहोम (कश्मीर)
गड्ढे में घर: बुर्जहोम
हड्डी के औजारों का केंद्र: चिरांड (बिहार)
भीमबेटका: पुरापाषाण काल की गुफा-चित्रकारी (MP); UNESCO विश्व धरोहर
राख के टीले: उत्नूर (AP) — नवपाषाण पशुपालन का प्रमाण
ताम्र-पाषाण काल में शवों को घर में ही दफनाने की परंपरा: जोर्वे संस्कृति
भीमबेटका में 500+ शैलाश्रय; गेरू (Ochre) रंग प्रमुख
महापाषाण संस्कृति की पहचान: काले-लाल मृद्भांड (BRW)
अदिच्चनल्लूर (तमिलनाडु): शव-कलश दफन (Urn Burial) का प्रमुख स्थल
जोगीमारा गुफा (छत्तीसगढ़): प्राचीनतम गुफा-रंगशाला

📖 आगे पढ़ें

सिंधु घाटी सभ्यता →

Suggetested Articles