संगम काल (~300 ई.पू.–300 ई.) वह युग है जब तमिल कवियों की शैक्षणिक सभाओं (संगम) में साहित्य का संकलन हुआ। यह दक्षिण भारत के इतिहास का वह काल है जिसकी जानकारी साहित्यिक साक्ष्यों से मिलती है। तीन प्रमुख तमिल राज्य — चेर, चोल, पांड्य — इस युग के केंद्र थे।
संगम काल — दक्षिण भारत का शास्त्रीय युग
तीन तमिल राज्य · संगम साहित्य · रोम से व्यापार | UPSC GS पेपर I
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संगम काल क्या है?
तीन तमिल राज्य
| राज्य | राजधानी | प्रतीक | क्षेत्र | विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| चेर | वांजी (करूर) | धनुष-बाण | केरल + पश्चिमी तमिलनाडु | मालाबार तट से रोम के साथ व्यापार; मसाले; बंदरगाह: मुसिरी |
| चोल | उरैयूर (बाद में कावेरीपट्टिनम्) | बाघ | पूर्वी तमिलनाडु (कावेरी डेल्टा) | धान की खेती; कावेरीपट्टिनम् बंदरगाह; सूती वस्त्र; समुद्री परंपरा |
| पांड्य | मदुरई | मछली (कार्प) | दक्षिणतम तमिलनाडु + केरल | मोती; रोमनों से व्यापार; मदुरई = कवियों का नगर; मेगस्थनीज ने उल्लेख किया |
प्रमुख संगम साहित्यिक रचनाएं
| रचना | रचयिता | महत्व |
|---|---|---|
| तोल्काप्पियम् | तोल्काप्पियर | प्राचीनतम तमिल व्याकरण; ध्वनिशास्त्र, काव्यशास्त्र; द्वितीय संगम से; सबसे पुराना जीवित तमिल ग्रंथ |
| तिरुक्कुरल | तिरुवल्लुवर | तमिल 'बाइबिल'; 1330 द्विपदियाँ; धर्म (अरम्), अर्थ (पोरुल), काम (इन्बम); 40+ भाषाओं में अनूदित |
| सिलप्पदिकारम् | इलंगो अडिगल (चेर राजकुमार) | महाकाव्य उपन्यास; कोवलन और कण्णगी की कथा; तीनों राज्यों का चित्रण; सर्वाधिक प्रसिद्ध |
| मणिमेकलई | सत्तनार | सिलप्पदिकारम् का उत्तरार्ध; बौद्ध सामग्री; कोवलन की पुत्री |
| पुरनानुरू | संकलन (अनेक कवि) | 400 कविताएं; युद्ध, वीरता; तीनों राज्यों के राजाओं का उल्लेख; इतिहास का अमूल्य स्रोत |
| अकनानुरू | संकलन | 400 प्रेम कविताएं; तिनाई व्यवस्था का वर्णन |
तिनाई व्यवस्था — पाँच भू-भाग
| तिनाई क्षेत्र | भू-दृश्य | प्रतीक फूल/वृक्ष | काव्य-भाव |
|---|---|---|---|
| कुरिंजि | पहाड़ी | कुरिंजि फूल | प्रेमियों का मिलन |
| मुल्लै | वन/चरागाह | मुल्लै (चमेली) | प्रतीक्षा; धैर्यपूर्ण प्रेम |
| मरुदम् | कृषिभूमि (नदी घाटी) | मरुदम् वृक्ष | अविश्वास; झगड़ा |
| नेय्तल | समुद्र तट | नीली जलकुमुदी | विरह; विदाई |
| पालै | मरुस्थल/बंजरभूमि | पालै वृक्ष | अलगाव; प्रेम में भागना |
रोम और भूमध्यसागरीय व्यापार
→ संगम तमिल राज्यों का रोम, ग्रीस और अरब से सक्रिय समुद्री व्यापार था
→ निर्यात: काली मिर्च, कपड़ा, हाथीदांत, मोती, सागौन; आयात: सोना, मदिरा
→ अरिकामेडु (पुड्डुचेरी के पास) — सर मार्टिमर व्हीलर ने उत्खनन किया; रोमन मिट्टी के बर्तन, एरेटाइन वेयर मिले
→ रोमन सम्राट ऑगस्टस को दक्षिण भारतीय राजाओं के दूत मिले (स्ट्राबो ने लिखा)
→ पेरिप्लस ऑफ द एरिथ्रियन सी — ग्रीक ग्रंथ जिसमें तमिल बंदरगाहों का वर्णन है
प्रशासन एवं राजनीति
→ राजतंत्र: राजा = 'वेंतर'; मंत्रिपरिषद = 'ऐंपेरावैय्यम'
→ राजसभा: पाँच सभाएँ — उर, सभा, नाडु, पेरू, मनरम
→ कर व्यवस्था: वारी (भूमि कर); इरवु (सीमा कर); उल्गु (शुल्क)
→ सेना: रथ, हाथी, घोड़े; तुमिलम (युद्ध ढोल)
संगम काल के प्रमुख शासक
| शासक | वंश | प्रमुख योगदान |
|---|---|---|
| करिकाल चोल | चोल | कावेरी पर कल्लणई (ग्रैंड एनिकट) — विश्व के प्राचीनतम बांधों में; पुहार (कावेरीपट्टिनम) का विकास |
| नेदुंजेलियन | पांड्य | कोवालन को दंडित; सिलप्पदिकारम में उल्लेख |
| चेरमन पेरुमल | चेर | मुज़िरिस बंदरगाह; रोम से व्यापार |
| एलारा | चोल | श्रीलंका तक विस्तार; न्यायप्रिय शासक |
संगम काल का पतन
→ कालभ्र आक्रमण (3rd–6th CE): 'अंधकार काल'; तमिल साहित्य में रिक्तता
→ कारण: आंतरिक कलह, कालभ्रों का आक्रमण, बदलते व्यापार मार्ग
→ पल्लव और पांड्य राजवंशों का उदय — संगम युग की विरासत आगे बढ़ी
त्वरित पुनरीक्षण
✅ प्रारंभिक परीक्षा के लिए अनिवार्य
→ तीन तमिल राज्य: चेर (वांजी), चोल (उरैयूर), पांड्य (मदुरई)
→ प्राचीनतम तमिल व्याकरण: तोल्काप्पियम्
→ तिरुक्कुरल: तिरुवल्लुवर; 1330 द्विपदियाँ
→ सिलप्पदिकारम्: इलंगो अडिगल; कोवलन-कण्णगी महाकाव्य
→ तृतीय संगम: मदुरई में; अधिकांश जीवित साहित्य यहाँ का
→ अरिकामेडु उत्खनन: सर मार्टिमर व्हीलर; रोमन मिट्टी के बर्तन
→ 5 तिनाई क्षेत्र: कुरिंजि, मुल्लै, मरुदम्, नेय्तल, पालै
→ वीर स्मारक पत्थर: नडुकल् (Nadukal)
→ राजा = वेंतर; पाँच सभाएँ: उर, सभा, नाडु, पेरू, मनरम
→ करिकाल चोल: कल्लणई (ग्रैंड एनिकट) — प्राचीनतम बांधों में
→ कालभ्र आक्रमण: अंधकार काल (3rd–6th CE)
🧠 स्मृति सूत्र
तीन राज्य + राजधानी: "चेर-वांजी-धनुष, चोल-उरैयूर-बाघ, पांड्य-मदुरई-मछली"
तिनाई: "कु मु म ने पा" = कुरिंजि, मुल्लै, मरुदम्, नेय्तल, पालै
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