गुप्त काल (320–550 ई.) में साहित्य, विज्ञान, गणित, खगोलविज्ञान, दर्शन और कला — सभी क्षेत्रों में एक साथ अभूतपूर्व उपलब्धियाँ हुईं। इसीलिए इसे भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है।
गुप्त साम्राज्य (320–550 ई.) — भारत का स्वर्ण युग
समुद्रगुप्त · चंद्रगुप्त द्वितीय · फाह्यान · नवरत्न | UPSC GS पेपर I
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गुप्त काल को 'स्वर्ण युग' क्यों कहते हैं?
गुप्त वंश — प्रमुख शासक
| शासक | काल | प्रमुख बातें |
|---|---|---|
| श्री गुप्त | ~240–280 ई. | गुप्त वंश के संस्थापक; छोटा राज्य |
| घटोत्कचगुप्त | ~280–319 ई. | श्री गुप्त के पुत्र |
| चंद्रगुप्त प्रथम | 319–335 ई. | पहला महान गुप्त राजा; लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह; 'महाराजाधिराज' उपाधि; <b>गुप्त संवत (319/320 ई.)</b> आरंभ |
| समुद्रगुप्त | 335–375 ई. | महान विजेता; 'भारत का नेपोलियन' (V.A. स्मिथ); प्रयाग प्रशस्ति (हरिषेण); वीणा वादन |
| चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) | 375–415 ई. | स्वर्ण युग का चरम; शकों पर विजय; नवरत्न; फाह्यान का दौरा; दिल्ली लौह स्तंभ |
| कुमारगुप्त प्रथम | 415–455 ई. | नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना; उपाधि महेंद्रादित्य |
| स्कंदगुप्त | 455–467 ई. | हूणों को पराजित किया; अंतिम महान गुप्त राजा |
चंद्रगुप्त विक्रमादित्य — नवरत्न
| नवरत्न | क्षेत्र | प्रमुख रचना/योगदान |
|---|---|---|
| कालिदास | साहित्य/कविता | अभिज्ञानशाकुंतलम्, मेघदूत, रघुवंश, कुमारसंभव |
| आर्यभट | गणित/खगोलविज्ञान | आर्यभटीय — π का मान, भूमि का घूमना, सूर्y/चंद्र ग्रहण की व्याख्या, दशमलव |
| वराहमिहिर | खगोल/ज्योतिष | बृहत्संहिता, पंचसिद्धांतिका |
| वाररुचि | व्याकरण | संस्कृत व्याकरण |
| अमरसिंह | शब्दकोश | अमरकोश — संस्कृत शब्दकोश |
| धन्वंतरि | आयुर्वेद | आयुर्वेद ग्रंथ |
| क्षपणक | जैन दर्शन/ज्योतिष | — |
| घटकर्पर | स्थापत्य | — |
| शंकु | स्थापत्य/शिल्प | — |
स्वर्ण युग की उपलब्धियाँ
| क्षेत्र | उपलब्धि |
|---|---|
| गणित | आर्यभट — शून्य की अवधारणा, दशमलव, π ≈ 3.1416; बीजगणित |
| खगोलविज्ञान | पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है; सूर्यकेंद्रीय; ग्रहण छाया से |
| चिकित्सा | चरकसंहिता (संपादित); सुश्रुतसंहिता — प्लास्टिक सर्जरी, मोतियाबिंद |
| साहित्य | कालिदास; विष्णुशर्मा — पंचतंत्र; विशाखदत्त — मुद्राराक्षस |
| कला | अजंता गुफाचित्र (गुप्त और उत्तर-गुप्त); नालंदा बौद्ध केंद्र |
| धातु विज्ञान | दिल्ली का लौह स्तंभ — 1600 वर्षों से जंग रहित |
| दर्शन | स्मृतियों का संकलन (मनुस्मृति); पुराण अंतिम रूप |
| स्थापत्य | दशावतार मंदिर (देवगढ़, MP) — पंचायतन शैली; पहले संरचनात्मक हिंदू मंदिर |
| शिक्षा | नालंदा विश्वविद्यालय (कुमारगुप्त); तक्षशिला जारी |
गुप्त काल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
| विद्वान | क्षेत्र | योगदान |
|---|---|---|
| आर्यभट्ट | खगोल/गणित | आर्यभटीयम; पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है; शून्य + दशमलव प्रणाली; π = 3.1416 |
| वराहमिहिर | खगोल | बृहत्संहिता; पंचसिद्धांतिका; भूगर्भ जल खोज विधि |
| ब्रह्मगुप्त | गणित | ब्रह्मस्फुट सिद्धांत; ऋणात्मक संख्या + शून्य के नियम |
| धन्वंतरि | चिकित्सा | आयुर्वेद के देवता; गुप्तकालीन चिकित्सा विकास |
| सुश्रुत | शल्य चिकित्सा | प्लास्टिक सर्जरी (नासिका संधान); सुश्रुत संहिता |
| नागार्जुन | रसायन | रसरत्नाकर; पारद और धातु शोधन |
गुप्तकालीन साहित्य एवं सांस्कृतिक उपलब्धियाँ
📚 प्रमुख साहित्यिक रचनाएँ
→ कालिदास: अभिज्ञान शाकुंतलम, मेघदूतम, रघुवंशम, कुमारसंभवम — 'भारत का शेक्सपियर' कहे जाते हैं
→ विशाखदत्त: मुद्राराक्षस — चंद्रगुप्त मौर्य एवं चाणक्य की कूटनीतिक कथा
→ शूद्रक: मृच्छकटिकम (मिट्टी की गाड़ी) — सामाजिक नाटक
→ अमरसिंह: अमरकोश — प्रसिद्ध संस्कृत शब्दकोश
🏛️ सांस्कृतिक उपलब्धियाँ
→ महरौली लौह स्तंभ: 1600+ वर्षों से जंग नहीं लगा; चंद्रगुप्त विक्रमादित्य काल; धातुकर्म का उत्कृष्ट उदाहरण
→ अजंता गुफा चित्र: गुप्तकालीन शिखर — गुफा 1, 2, 16, 17 सर्वाधिक महत्वपूर्ण; बुद्ध जातक कथाओं का चित्रण; UNESCO विश्व धरोहर
त्वरित पुनरीक्षण
✅ प्रारंभिक परीक्षा के लिए अनिवार्य
→ गुप्त संवत: 319/320 ई. (चंद्रगुप्त प्रथम)
→ 'भारत का नेपोलियन': समुद्रगुप्त (V.A. स्मिथ)
→ प्रयाग प्रशस्ति लेखक: हरिषेण
→ फाह्यान का दौरा: 399–414 ई. (चंद्रगुप्त II)
→ लौह स्तंभ (दिल्ली): चंद्रगुप्त II काल
→ नालंदा संस्थापक: कुमारगुप्त प्रथम
→ आर्यभट का ग्रंथ: आर्यभटीय
→ कालिदास की श्रेष्ठ रचना: अभिज्ञानशाकुंतलम्
→ पंचायतन मंदिर: दशावतार मंदिर, देवगढ़
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