उत्तर-मौर्य काल (185 ई.पू.–320 ई.)

शुंग · सातवाहन · इंडो-ग्रीक · शक · कुषाण | UPSC GS पेपर I

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📋 प्राचीन इतिहास श्रृंखला

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शुंग वंश (185–73 ई.पू.)

→ संस्थापक: पुष्यमित्र शुंग — मौर्य सेनापति; 185 ई.पू. में अंतिम मौर्य राजा बृहद्रथ को सैन्य परेड में मारा
→ ब्राह्मण पुनरुत्थान — दो अश्वमेध यज्ञ किए; संस्कृत का पुनरुद्धार
→ यूनानी राजा डेमेट्रियस और मेनांडर को हराया
→ पतंजलि — महाभाष्य के रचयिता; पुष्यमित्र के दरबार में
→ कालिदास की मालविकाग्निमित्र — पुष्यमित्र के पुत्र अग्निमित्र की कथा
→ सांची स्तूप के तोरण द्वार — शुंग काल में निर्मित
→ भरहुत स्तूप (MP) — शुंग काल की जातक कथाएं उकेरी

सातवाहन वंश (1 शताब्दी ई.पू.–3 शताब्दी ई.)

→ 'आंध्र' भी कहलाते थे; राजधानी: प्रतिष्ठान (पैठण), गोदावरी नदी
→ सर्वश्रेष्ठ राजा: गौतमीपुत्र सातकर्णि — शकों, पह्लवों, यवनों को हराया; विंध्य पर्वत का स्वामी
→ मातृनामकरण: माता के नाम पर राजाओं का नाम — भारतीय इतिहास में अनोखा उदाहरण
→ मुद्रा: भारत में पहली बार सीसे के सिक्के जारी किए
→ व्यापार: रोम के साथ समुद्री व्यापार; सोपारा, कल्याण बंदरगाह
→ कला: अमरावती शैली — चूने पत्थर की मूर्तियाँ; जीवंत और गतिशील शैली; आंध्र प्रदेश

उत्तर-पश्चिम भारत के विदेशी शासक

वंशकालप्रमुख शासकप्रमुख योगदान
इंडो-ग्रीक (बैक्ट्रियन)~180 ई.पू.–10 ई.मेनांडर/मिलिंद (सर्वाधिक प्रसिद्ध)भारत में पहले सुवर्ण सिक्के; मिलिंदपन्हो; द्विभाषी सिक्के (ग्रीक+खरोष्ठी)
शक (सीथियन)1 शताब्दी ई.पू.–4 शताब्दी ई.रुद्रदामन प्रथम (सर्वाधिक प्रसिद्ध)जूनागढ़ (गिरनार) शिलालेख — शुद्ध संस्कृत गद्य का पहला अभिलेख; सुदर्शन झील की मरम्मत
पार्थियन (पह्लव)1 शताब्दी ई.पू.–1 शताब्दी ई.गोंडोफेरनेससेंट थॉमस (दुनिया भर में कहे जाने वाले) उनके शासनकाल में भारत आए
कुषाण (युएंझी जनजाति)1–3 शताब्दी ई.कुजुला कडफिसेस (संस्थापक); कनिष्क प्रथम (महानतम)गंधार कला; 4th बौद्ध संगीति; रेशम मार्ग; महायान बौद्ध धर्म

कनिष्क — महान कुषाण राजा

→ राजधानी: पुरुषपुर (पेशावर); द्वितीय राजधानी मथुरा
→ 78 ई. — शक संवत की संभावित शुरुआत — भारत सरकार का राष्ट्रीय पंचांग
→ चतुर्थ बौद्ध संगीति — कुण्डलवन (कश्मीर); अध्यक्ष: वसुमित्र; उपाध्यक्ष: अश्वघोष
→ दरबारी विद्वान: अश्वघोष (बुद्धचरित), नागार्जुन (माध्यमिका दर्शन), चरक (चरकसंहिता)
→ गंधार कला: ग्रीको-बौद्ध शैली; पहली बार बुद्ध की मानवीय मूर्तियाँ; धूसर श्लेट पत्थर; उत्तर-पश्चिमी भारत

कला विद्यालय — गांधार, मथुरा, अमरावती

विशेषतागांधार शैलीमथुरा शैलीअमरावती शैली
प्रभावग्रीक-रोमनपूर्णतः भारतीयदक्षिण भारतीय
सामग्रीस्लेटी/नीला शिस्टलाल बलुआ पत्थरसफ़ेद संगमरमर
बुद्धयथार्थवादी, मूँछ-दाढ़ी; तरंगित बालमुस्कुराता चेहरा; पारदर्शी वस्त्रसुडौल; गतिमान मुद्रा
संरक्षककनिष्क (कुषाण)कुषाण + गुप्तसातवाहन
स्थानपेशावर, तक्षशिलामथुरा, सारनाथअमरावती, नागार्जुनकोंडा

व्यापार मार्ग एवं आर्थिक जीवन

→ उत्तरापथ: तक्षशिला → पाटलिपुत्र; रेशम मार्ग से जुड़ता था
→ दक्षिणापथ: प्रतिष्ठान (पैठन) → मध्य भारत
→ समुद्री व्यापार: रोम से मसाले, रत्न, मलमल निर्यात; रोमन सिक्के दक्षिण भारत में प्राप्त
→ 'पेरिप्लस ऑफ द एरिथ्रियन सी' (1st CE): बंदरगाह — भरूच, सोपारा, मुज़िरिस (केरल)

पश्चिमी क्षत्रप एवं चेदि वंश

→ पश्चिमी क्षत्रप (शक): रुद्रदामन I (150 ई.) — जूनागढ़ अभिलेख (पहला संस्कृत अभिलेख), सुदर्शन झील की मरम्मत
→ चेदि वंश: खारवेल (कलिंग) — हाथीगुम्फा अभिलेख; जैन धर्म का संरक्षक; पाटलिपुत्र पर आक्रमण

त्वरित पुनरीक्षण

✅ प्रारंभिक परीक्षा के लिए अनिवार्य

→ पुष्यमित्र शुंग ने मारा: बृहद्रथ (अंतिम मौर्य)
→ सांची तोरण द्वार: शुंग काल
→ सातवाहनों के सीसे के सिक्के: भारत में पहले
→ शुद्ध संस्कृत गद्य का पहला अभिलेख: रुद्रदामन I — जूनागढ़
→ मिलिंदपन्हो: मेनांडर ↔ नागसेन
→ शक संवत (78 ई.): कनिष्क से संबंधित; राष्ट्रीय पंचांग
→ भारत में पहले सुवर्ण सिक्के: इंडो-ग्रीक
→ गंधार कला: ग्रीको-बौद्ध; उत्तर-पश्चिमी भारत; कुषाण
→ मथुरा कला: लाल बलुआ पत्थर; पूर्णतः भारतीय शैली
→ अमरावती कला: सफ़ेद संगमरमर; सातवाहन; गतिमान मुद्रा
→ उत्तरापथ: तक्षशिला → पाटलिपुत्र; रेशम मार्ग
→ खारवेल (चेदि): हाथीगुम्फा अभिलेख; जैन संरक्षक

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