| प्रकार | कारण |
|---|---|
| राजनीतिक | डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स (व्यपगत नीति) — डलहौजी ने गोद प्रथा बंद की → झाँसी, सतारा, नागपुर हड़पे; अवध का विलय (1856) — वाजिद अली शाह को हटाया |
| आर्थिक | भारतीय हस्तशिल्प नष्ट; किसानों पर कर का बोझ; भूमि राजस्व नीतियां (स्थायी बंदोबस्त, रैयतवाड़ी, महालवाड़ी); धन का इंग्लैंड को प्रवाह |
| सैनिक | अंग्रेज वेतन में अधिक; भारतीय सिपाही कर्नल से ऊपर नहीं जा सकते थे; समुद्र पार करने पर धर्म नष्ट होने का भय; जनरल सर्विस एनलिस्टमेंट एक्ट 1856 |
| सामाजिक-धार्मिक | ईसाई मिशनरीज का धर्म परिवर्तन; सती प्रथा और विधवा विवाह पर अंग्रेजी हस्तक्षेप; भारतीय समाज में 'सुधार' का भय |
| तात्कालिक | चर्बी वाले कारतूस — गाय और सूअर की चर्बी; हिंदुओं और मुसलमानों दोनों के धर्म पर आघात; 29 मार्च 1857 — मंगल पांडे ने बैरकपुर में गोली चलाई |
1857 का विद्रोह — प्रथम स्वतंत्रता संग्राम
10 मई 1857 — मेरठ से दिल्ली तक | कारण, नेता, परिणाम | UPSC GS पेपर I
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इतिहासकारों के विभिन्न मत:
→ वी.डी. सावरकर: 'प्रथम स्वातंत्र्य समर' — राष्ट्रीय स्वतंत्रता-युद्ध
→ ब्रिटिश इतिहासकार: 'सिपाहियों का विद्रोह' — केवल सैनिक असंतोष
→ आर.सी. मजूमदार: न पहला, न राष्ट्रीय, न स्वतंत्रता संग्राम — बल्कि कुछ हद तक तीनों
1857 के विद्रोह के कारण
प्रमुख नेता
| नेता | केंद्र | विवरण |
|---|---|---|
| मंगल पांडे | बैरकपुर (बंगाल) | 29 मार्च 1857 को विद्रोह की पहली चिनगारी; 8 अप्रैल 1857 को फाँसी |
| बहादुर शाह जफर II | दिल्ली | अंतिम मुगल बादशाह; विद्रोहियों ने नेता बनाया; बाद में रंगून निर्वासित; वहीं 1862 में मृत्यु |
| रानी लक्ष्मीबाई | झाँसी | व्यपगत नीति से राज्य हड़पा; 'खूब लड़ी मर्दानी, वह तो झाँसी वाली रानी थी'; जून 1858 में ग्वालियर में युद्ध करते हुए वीरगति |
| नाना साहब | कानपुर | पेशवा बाजीराव II के दत्तक पुत्र; पेंशन बंद की गई; कानपुर विद्रोह का नेतृत्व |
| तांतिया टोपे | कानपुर, झाँसी | नाना साहब के सेनापति; रानी लक्ष्मीबाई के साथ ग्वालियर; 1859 में धोखे से पकड़े गए और फाँसी |
| बेगम हजरत महल | लखनऊ | अवध के नवाब की पत्नी; ब्रिटिश शासन का विरोध; नेपाल में शरण ली |
| कुंवर सिंह | आरा (बिहार) | 80 वर्षीय बुजुर्ग; बड़े उत्साह से लड़े; अंग्रेजों ने हाथ काटा — नदी में डाल दिया; 1858 में वीरगति |
असफलता के कारण और परिणाम
असफलता के कारण:
→ सम्पूर्ण भारत में नहीं फैला — मद्रास, बंबई, पंजाब, सिंध अधिकांशतः शांत
→ केंद्रीय नेतृत्व का अभाव; 80 वर्षीय बहादुर शाह जफर अनुपयुक्त नेता
→ सिख, राजपूत, नेपाली गुरखा अंग्रेजों के साथ रहे
→ कोई वैचारिक एकता नहीं; अलग-अलग स्वार्थ
→ आधुनिक हथियारों की कमी; अंग्रेजों की उच्च तकनीक
परिणाम (भारत सरकार अधिनियम 1858):
→ ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त; ब्रिटिश ताज का प्रत्यक्ष शासन
→ गवर्नर जनरल → वायसराय; भारत के लिए भारत सचिव (Secretary of State) लंदन में
→ अब से अधिक भारतीय रियासतों को 'लैप्स' नहीं किया जाएगा
→ सेना में भारतीयों की संख्या घटाई; तोपखाना अंग्रेजों के हाथ में
विद्रोह का प्रसार — क्षेत्रवार विश्लेषण
1857 का विद्रोह मेरठ से शुरू होकर उत्तर और मध्य भारत के अनेक क्षेत्रों में फैल गया। प्रत्येक क्षेत्र में स्थानीय नेतृत्व और परिस्थितियाँ भिन्न थीं:
| क्षेत्र | नेता | प्रमुख घटनाएँ |
|---|---|---|
| दिल्ली (11 मई 1857) | बहादुर शाह ज़फ़र (सांकेतिक नेता); बख्त खां (सैन्य नेतृत्व) | मेरठ के सिपाहियों ने दिल्ली पहुँचकर लाल किले पर कब्जा किया; बहादुर शाह को सम्राट घोषित किया; सितंबर 1857 में जॉन निकोलसन ने अंग्रेजों के लिए दिल्ली पुनः जीती; हडसन ने मुगल शहजादों की हत्या की |
| लखनऊ | बेगम हज़रत महल | ब्रिटिश रेसिडेंसी की घेराबंदी 87 दिनों तक चली; हेनरी लॉरेंस की मृत्यु; कैम्पबेल ने मार्च 1858 में लखनऊ मुक्त कराया; बेगम हज़रत महल ने नेपाल में शरण ली |
| कानपुर | नाना साहब; तांतिया टोपे (सेनापति) | सतीचौरा घाट हत्याकांड — अंग्रेज स्त्री-बच्चों की मृत्यु; बीबीघर हत्याकांड; नील और हैवलॉक ने जुलाई 1857 में कानपुर पुनः जीता; नाना साहब अज्ञातवास में चले गए |
| झाँसी | रानी लक्ष्मीबाई | ह्यू रोज़ ने मार्च 1858 में झाँसी पर आक्रमण किया; रानी ने वीरता से लड़ा; तांतिया टोपे के साथ ग्वालियर पर कब्जा; 17-18 जून 1858 में ग्वालियर में वीरगति प्राप्त |
| बिहार (आरा) | कुंवर सिंह | 70+ वर्ष के राजपूत जमींदार; गुरिल्ला युद्ध शैली अपनाई; आज़मगढ़ और बलिया में अंग्रेजों को हराया; घायल हाथ काटकर गंगा में अर्पित किया; अप्रैल 1858 में वीरगति |
| फ़ैज़ाबाद | मौलवी अहमदुल्लाह शाह | 'विद्रोह का प्रकाश-स्तंभ' (Lighthouse of Rebellion); चिनहट में अंग्रेजी सेना को हराया; पुवायाँ के राजा ने विश्वासघात से 5 जून 1858 को मारा; अंग्रेजों ने 50,000 रुपये का ईनाम रखा था |
| बरेली | खान बहादुर खान | रोहिल्ला सरदार; अंग्रेजी शासन के विरुद्ध बरेली में स्वतंत्र प्रशासन स्थापित किया; 1860 में पकड़े गए और फाँसी |
UPSC के लिए ध्यान दें:
→ दक्षिण भारत (मद्रास, बंबई) और पंजाब, सिंध में विद्रोह का प्रसार बहुत सीमित रहा
→ सिख सैनिकों ने अंग्रेजों का साथ दिया — दिल्ली जीतने में सहायक
→ हैदराबाद के निज़ाम, ग्वालियर के सिंधिया, इंदौर के होलकर जैसे शासकों ने अंग्रेजों का समर्थन किया
अंग्रेजों की नीतियाँ जो विद्रोह का कारण बनीं
1857 के विद्रोह की पृष्ठभूमि में अंग्रेजों की विस्तारवादी और शोषणकारी नीतियों की प्रमुख भूमिका थी। नीचे दी गई सारणी में इन नीतियों का विस्तृत विवरण है:
| नीति | लागू करने वाला | विवरण एवं प्रभाव |
|---|---|---|
| व्यपगत का सिद्धांत (डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स) | लॉर्ड डलहौजी (1848-56) | यदि किसी शासक का कोई प्राकृतिक उत्तराधिकारी न हो तो राज्य अंग्रेजों में विलय; सतारा (1848), जैतपुर (1849), सम्बलपुर (1849), बघाट (1850), उदयपुर (1852), झाँसी (1853), नागपुर (1854) हड़पे गए |
| सहायक संधि (Subsidiary Alliance) | लॉर्ड वेलेज़ली (1798) | भारतीय शासकों को अंग्रेजी सेना रखनी पड़ती थी और उसका खर्च वहन करना होता था; किसी अन्य विदेशी शक्ति से संधि नहीं कर सकते थे; संप्रभुता समाप्त — हैदराबाद पहला शिकार (1798); बाद में मैसूर, अवध, तंजौर सहित अनेक |
| अवध का विलय (1856) | लॉर्ड डलहौजी | कुशासन (Misgovernance) का बहाना बनाकर; नवाब वाजिद अली शाह को गद्दी से हटाकर कलकत्ता भेजा; अवध की जनता और सेना में भारी आक्रोश — 1857 विद्रोह में लखनऊ प्रमुख केंद्र बना |
| जनरल सर्विस एनलिस्टमेंट एक्ट (1856) | लॉर्ड कैनिंग | भारतीय सिपाहियों को समुद्र पार जाकर सेवा देना अनिवार्य; हिंदू मान्यता के अनुसार समुद्र पार करने से धर्म भ्रष्ट होता है — इससे सिपाहियों में भारी असंतोष |
| भूमि राजस्व नीतियाँ | विभिन्न गवर्नर जनरल | स्थायी बंदोबस्त (1793): कॉर्नवालिस — बंगाल; जमींदारों को स्थायी कर; किसानों का शोषण। रैयतवाड़ी (1820): मद्रास-बंबई; सीधे किसान से कर; दरें बहुत ऊँची। महालवाड़ी (1833): उत्तर-पश्चिम प्रांत; गाँव की सामूहिक भूमि पर कर |
महत्वपूर्ण: इन सभी नीतियों ने भारतीय शासकों, सैनिकों, किसानों और आम जनता — सभी वर्गों में असंतोष पैदा किया, जो 1857 के विद्रोह के रूप में फूट पड़ा।
त्वरित पुनरीक्षण — UPSC
⚡ Quick Revision — 1857 का विद्रोह
→ 29 मार्च 1857: मंगल पांडे ने बैरकपुर छावनी में गोली चलाई
→ 8 अप्रैल 1857: मंगल पांडे को फाँसी दी गई
→ 10 मई 1857: मेरठ में सिपाहियों ने विद्रोह शुरू किया — विद्रोह की आधिकारिक तिथि
→ 11 मई 1857: विद्रोही दिल्ली पहुँचे; बहादुर शाह ज़फ़र को सम्राट घोषित किया
→ सितंबर 1857: जॉन निकोलसन ने दिल्ली पुनः जीती; बहादुर शाह ज़फ़र गिरफ्तार
→ जून 1858: रानी लक्ष्मीबाई ग्वालियर में वीरगति को प्राप्त
→ 1858: भारत सरकार अधिनियम (Government of India Act) — कंपनी शासन समाप्त
→ 1 नवंबर 1858: महारानी विक्टोरिया का घोषणापत्र — भारतीय रियासतों को लैप्स नहीं किया जाएगा
→ 1859: तांतिया टोपे विश्वासघात से पकड़े गए और फाँसी
→ 1862: बहादुर शाह ज़फ़र की रंगून में मृत्यु
UPSC में बार-बार पूछे गए तथ्य:
→ 'प्रथम स्वतंत्रता संग्राम' — वी.डी. सावरकर ने कहा (1909, 'The Indian War of Independence 1857')
→ 'सिपाही विद्रोह' — ब्रिटिश इतिहासकारों ने कहा
→ 'संगठित विद्रोह नहीं बल्कि जनसंघर्ष' — एस.बी. चौधरी
→ डलहौजी द्वारा हड़पे गए राज्य: सतारा → जैतपुर → सम्बलपुर → बघाट → उदयपुर → झाँसी → नागपुर
→ विद्रोह के बाद सेना में अंग्रेज-भारतीय अनुपात: बंगाल में 1:2, मद्रास-बंबई में 1:3
→ 'महारानी का घोषणापत्र' (Queen's Proclamation) 1858 — ब्रिटिश ताज ने सीधे शासन में भारतीय रीतियों/धर्म में हस्तक्षेप न करने का वचन दिया
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