मराठा साम्राज्य (1674–1818)
शिवाजी | अष्टप्रधान | पेशवा | मराठा संघ | UPSC GS पेपर I
KnowledgeKnot में आपका स्वागत है! इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें।
शिवाजी (1630–1680)
| घटना | वर्ष | विवरण |
|---|
| जन्म | 1630 | महाराष्ट्र के शिवनेरी दुर्ग में; माता जीजाबाई; पिता शाहजी भोंसले |
| तोरण दुर्ग विजय | 1645-47 | 15-17 साल की उम्र में पहली सैन्य विजय |
| प्रतापगढ़ युद्ध | 1659 | अफजल खां का वध; बीजापुर सल्तनत को हराया |
| सूरत की लूट | 1664 | अंग्रेजों व मुगलों के समृद्ध व्यापार केंद्र को लूटा |
| आगरा से भागना | 1666 | औरंगजेब ने आगरा में नजरबंद किया; मिठाई की टोकरियों में छिपकर भागे |
| राज्याभिषेक | 1674 | रायगढ़ दुर्ग में; 'छत्रपति' की उपाधि; गागा भट्ट ने वैदिक संस्कार से |
| मृत्यु | 1680 | रायगढ़ में; 50 वर्ष की आयु में; अतिसार (dysentery) से |
गनिमी कावा (छापामार युद्ध): पहाड़ी इलाकों में शत्रु को परेशान करना; रात में हमला; जंगलों का उपयोग; मुगल सेना की विशाल संख्या के सामने प्रभावी रणनीति
अष्टप्रधान (8 मंत्रिमंडल)
| पद | कार्य |
|---|
| पेशवा (प्रधानमंत्री) | प्रशासन और राजनीति का प्रमुख; बाद में छत्रपति से अधिक शक्तिशाली |
| अमात्य (वित्तमंत्री) | राजकोष और आय-व्यय का प्रबंधन |
| मंत्री (गृहमंत्री) | राजा की व्यक्तिगत जानकारी; रोजनामचा |
| सचिव (सचिव) | राज पत्राचार और दरबार शिष्टाचार |
| सुमंत (विदेशमंत्री) | विदेशी राजनय और संधियां |
| सेनापति (युद्धमंत्री) | सेना संगठन और सैन्य अभियान |
| पंडितराव (धर्ममंत्री) | धार्मिक मामले और दान-अनुदान |
| न्यायाधीश (न्यायमंत्री) | न्यायिक निर्णय और कानून |
पेशवा और मराठा संघ
प्रमुख पेशवा:
→ बालाजी विश्वनाथ (1713–20): प्रथम वास्तविक पेशवा; मुगलों से छत्रपति शाहू के लिए सनद प्राप्त की
→ बाजीराव I (1720–40): श्रेष्ठतम पेशवा; 41 युद्धों में कभी नहीं हारे; मालवा, गुजरात, बुंदेलखंड जीते; दिल्ली तक पहुंचे; 'उत्तर की तूफान'
→ नाना साहब/बालाजी बाजीराव (1740–61): मराठा संघ का विस्तार; पानीपत III (1761) में अहमदशाह अब्दाली से हार → मराठा शक्ति को बड़ा झटका
→ माधवराव I (1761–72): हार के बाद पुनरुद्धार; सर्वश्रेष्ठ प्रशासक; 27 वर्ष की आयु में तपेदिक से मृत्यु
मराठा संघ के 5 प्रमुख घराने:
पेशवा (पुणे), भोंसले (नागपुर), होलकर (इंदौर), सिंधिया (ग्वालियर), गायकवाड़ (बड़ोदा)
राजस्व व्यवस्था
→ चौथ: पड़ोसी राज्यों की आय का 1/4 भाग — सुरक्षा कर; यदि यह न दिया तो मराठा हमला करेंगे
→ सरदेशमुखी: आय का अतिरिक्त 1/10 — शिवाजी के 'वंशानुगत सरदेशमुखी' अधिकार का दावा
→ पानीपत का तृतीय युद्ध (1761): अहमदशाह अब्दाली vs मराठे (विश्वासराव, सदाशिवराव भाऊ); मराठों की करारी हार — 28 जनवरी 1761; अफगान विजय; मराठा शक्ति का कमजोर होना लेकिन पूर्ण अंत नहीं
मराठा उत्तराधिकारी — शम्भाजी से शाहू तक
| शासक | काल | विवरण |
|---|
| शम्भाजी | 1680–1689 | शिवाजी के पुत्र; औरंगज़ेब ने धोखे से पकड़ा; इस्लाम स्वीकार करने से इनकार; 40 दिन यातना सहकर शहीद |
| राजाराम | 1689–1700 | जिंजी किले से प्रतिरोध जारी रखा; मुगलों के विरुद्ध गनिमी कावा युद्ध |
| ताराबाई | 1700–1707 | राजाराम की विधवा; औरंगज़ेब की मृत्यु तक संघर्ष जारी; साहसी शासिका |
| शाहू | 1707–1749 | शम्भाजी के पुत्र; मुगल कैद से मुक्त; पेशवा काल की शुरुआत; बालाजी विश्वनाथ को पेशवा नियुक्त किया |
मराठा संघ — पाँच प्रमुख सरदार
→ भोंसले (नागपुर): पूर्वी विस्तार; ओडिशा और बंगाल की ओर
→ होल्कर (इंदौर): अहिल्याबाई होल्कर — सर्वश्रेष्ठ प्रशासिका; न्यायप्रिय; मंदिर और धर्मशालाओं का निर्माण
→ सिंधिया (ग्वालियर): महादजी सिंधिया — सबसे शक्तिशाली सरदार; दिल्ली पर नियंत्रण; फ्रांसीसी प्रशिक्षित सेना
→ गायकवाड़ (बड़ौदा): गुजरात क्षेत्र का प्रशासन; ब्रिटिश काल में भी रजवाड़ा बना रहा
→ पेशवा (पुणे): मराठा संघ का प्रमुख; वास्तविक शासक; छत्रपति नाममात्र के शासक
एंग्लो-मराठा युद्ध
| युद्ध | काल | प्रमुख घटनाएँ / परिणाम |
|---|
| प्रथम एंग्लो-मराठा युद्ध | 1775–82 | वाडगाँव की लड़ाई — अंग्रेजों की हार; सालबाई की संधि (1782) — यथास्थिति बहाल |
| द्वितीय एंग्लो-मराठा युद्ध | 1803–05 | असाई का युद्ध — आर्थर वेलेज़ली (वेलिंगटन); अंग्रेजों ने दिल्ली-आगरा प्राप्त; बसीन की संधि (1802) से शुरू |
| तृतीय एंग्लो-मराठा युद्ध | 1817–18 | कोरेगाँव का युद्ध; पेशवाई समाप्त; बाजीराव II को बिठूर में पेंशन; मराठा शक्ति का पूर्ण अंत |
त्वरित पुनरीक्षण
→ शिवाजी — छत्रपति (1674); गनिमी कावा; अष्टप्रधान; चौथ + सरदेशमुखी
→ शम्भाजी — शहीद; राजाराम और ताराबाई ने प्रतिरोध जारी रखा
→ बालाजी विश्वनाथ — प्रथम प्रभावशाली पेशवा; बाजीराव I — सर्वश्रेष्ठ पेशवा
→ पानीपत III (1761) — अब्दाली से हार; मराठा शक्ति कमजोर
→ मराठा संघ — भोंसले, होल्कर, सिंधिया, गायकवाड़, पेशवा
→ तीन एंग्लो-मराठा युद्ध (1775–1818) — तृतीय युद्ध में पेशवाई समाप्त
→ अहिल्याबाई होल्कर — आदर्श प्रशासिका; महादजी सिंधिया — शक्तिशाली सरदार